Wednesday, September 7, 2011

खामोशी से निकलें बाहर


पं. महेश शर्मा

कहते हैं कि मौन सबसे बड़ा हथियार है। यह भी माना जाता है कि एक चुप्पी हजार वाक्यों पर भारी पड़ती है। लेकिन खामोशी, चुप्पी व मौन से बढ़कर जब बात संवादहीनता पर आती है तो यह रिश्तों के लिए खतरनाक हो सकती है। खामोशी का यह हथियार आमतौर पर दूसरे को सजा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसका असर रिश्ते पर पड़ता है। कई बार बहस या विवाद के बजाय चुप्पी अधिक आहात करती है।
पति-पत्नी के संबंधों में भावनाओं व विचारों को शेयर न करना न सिर्फ संबंधों को प्रभावित करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। इसके कारण हृदय रोग सहित स्ट?ोक तक का खतरा हो सकता है। विशेशज्ञों का मानना है कि अगर आप अपने साथी से भावनाएं नहीं बांट पाते और किसी न किसी कारण संवादहीनता की स्थिति में जा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके रिश्तों में बिखराव आ रहा है। विशेशज्ञ यह भी कहते हैं कि स्त्रियों को यह चुप्पी ज्यादा प्रभावित करती है, क्योंकि उनका मानना होता है कि हम शांति चाहते हैं। चाहते हैं कि सब खुश रहें। वैसे भी बात बढ़ाने से क्या फायदा। लेकिन यह शांति शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक सेहत की कीमत पर पैदा होती है। यानी संवादहीनता या रिश्तों का यह सन्नाटा तीन स्तरों पर दिखाई देता है।

मानसिक स्तर - जब आपस में बातचीत लगभग खत्म होने लगे।

शारीरिक स्तर - शीतयुद्ध का प्रभाव बेडरूम तक आ जाए।

भावनात्मक स्तर - यह गंभीर स्थिति है। इसमें लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े होने से भी कतराने लगते हैं। दूसरे अर्थ में संवादहीनता संवेदनहीन भी बनाने लगती है। सन्नाटे का यह अंधेरा वास्तव में रिश्तों पर गहराने लगा है।

इन समस्याओं से आप अपने दांपत्य जीवन को बचाना चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि आप कुछ बातों पर ध्यान दें:

संवाद - हर हाल में आपसी बातचीत करते रहें। संवादहीनता रिश्तों को जड़ बना देती है। इससे बचने की कोशिश करें।

प्रतिबद्धता - प्रतिबद्धता हर रिश्ते में जरूरी है। इसके बिना रिश्तों में गहराई नहीं आ सकती।

काॅम्प्लीमेंट्स - साथी की सराहना भी जरूरी है। आलोचना करने की हजार वजहें हो सकती हैं। लेकिन साथी के कुछ गुण तो तारीफ के काबिल भी होते हैं, उन पर ध्यान दें। प्रशंसा में कंजूसी न करें।
परवाह - एक-दूसरे का ख्याल तभी रखा जा सकता है जब साथी से मानसिक-भावनात्मक रूप से जुड़े हों। कोई हमारा ख्याल रखता है यह एक बात हर दुख से उबारने की ताकत रखती है।

जुड़ाव - एक-दूसरे से जुड़ाव का होना जरूरी है। यह हर क्शेत्र में दिखना चाहिए। ये हैं तो संवादहीनता होगी ही नहीं। शादीशुदा जिंदगी प्यार, सम्मान, ख्याल, समर्पण व साझेदारी पर टिकती है। विवाह एक संस्था से बढ़कर प्रतिबद्ध रिश्ता भी है। इस रिश्ते की मिठास बनाए रखने के लिए अपनी भावनाओं व मीठी बातों की चाशनी इसमें घोलते रहें। दिल की गहराइयों से साथी से प्रेम करें।

हर अच्छाई - बुराई से इतर यह सोचें कि कोई है जो हमेशा साथ खड़ा है। जिससे आप सबकुछ साझा कर सकते हैं और जिसके लिए जिंदगी की हर तकलीफ झेल सकते हैं। क्या यह सच नहीं कि अपने दांपत्य को हर व्यक्ति बेहतरीन बनाना चाहता है? तो फिर रोजमर्रा के जीवन में बेहतरी की कोशिश क्यो? अब इसके बाद तो अपनी खामोशी तोड़ दीजिए और बांहें फैलाकर साथी का स्वागत कीजिए।

Monday, September 5, 2011

समझदारी से काम लें


पं. महेश शर्मा

वैवाहिक जीवन की जटिलता को समझना मुश्किल है। दांपत्य जीवन में अक्सर बहुत  से ऐसे कारण पैदा हो जाते हैं जो मनमुटाव का कारण बनते हैं। लेकिन सुखी दांपत्य जीवन के उपाय जरूर किए जा सकते हैं। 

कई बार ऐसा होता है कि  छोटी-मोटी बातों को लेकर परस्पर अविश्वास की स्थिति पैदा हो जाती है। खटास अगर देर तक और दूर तक बनी रहती है तो अलगाव तक मामला जा पहुंचता है।  इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि एक-दूसरे के महत्व को अच्छी तरह से समझें और जरूरतों को भी पूरा करते रहें। आपाधापी और आर्थिक समस्या से लेकर कई समस्याएं ऐसी हैं, जो मनमुटाव, संबंधों में कड़वाहट को जन्म देती हैं। अक्सर सेक्स से संबंधित समस्या और अलग-अलग सोच वैवाहिक जीवन में जटिलता और रिश्तों में दरार के सामान्य कारण हैं। 

कई बार संबंधों में दरार बहुत ज्यादा अपेक्षा की वजह से भी आ सकती है। साथी से जितनी अधिक अपेक्षाएं होंगी संबंधों में उतनी ही समस्याएं भी बढ़ती चली जाएंगी। बहुत से दम्पत्ति ऐसे भी हैं जिनमें सोच या रूचि में अंतर की वजह से प्रेम नहीं पनप पाता और नतीजतन परस्पर असंतोष की भावना उग्र होकर संबंधों में खटास बढ़ाती चली जाती है। बात-बात पर गैर जरूरी हस्तक्षेप भी मनमुटाव बढ़ाता है और जीवन में जटिलताएं आनी शुरू हो जाती हैं। 

कई मामलों में तो शादी का पहला साल पूरा होते-होते घरेलू जिम्मेदारियां बढ़ती हैं तो पैसे को लेकर झगड़ा दंपतियों के बीच सामान्य बात हो गयी है। तेरा पैसा, मेरा पैसा की बजाय हमारा पैसा नहीं बन पाने की वजह झगड़े का सबब बनती है। अगर समझबूझ से यही काम लिया जाए और थोड़ा सा समझौतावादी रुख अपनाया जाए तो बढ़ती बात थम जाती है। हर मध्यवर्गीय माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी या बेटे की शादी आर्थिक रूप से समृद्ध घरबार में हो। यही शुरुआती सोच जरूरत से ज्यादा अपेक्षाओं को दोनों तरफ जन्म देती है जो भविष्य में समस्याओं का पिटारा बन सकती है। इससे दांपत्य जीवन में कलह पैदा होती है। 

नतीजा यह होता है कि पुरुष स्त्रियों को अधिक खर्चीला मानते हैं तो स्त्रियां पुरुषों को। यह मुददा ठीक है या नहीं यह बहस का विषय हो सकता है पर ऐसे बहुत से परिवार हैं जिनके पास भरपूर पैसे नहीं होते हैं और वे जरूरतें पूरी न होने के कारण परेशान रहते हैं। संबंधों में दरार का आज यह बहुत बड़ा कारण हैं। स्तरीय व मनचाहा जीवन जीने के लिए पैसे का अहम रोल है, इसमें दो राय नहीं हो सकतीं। पर इसे इतना भी महत्व नहीं दिया जाना चाहिए कि दांपत्य में दरार पैदा हो जाए। पैसा व्यावहारिक और संवेदनशील मुद्दा है। इच्छाएं बहुत होती हैं, लेकिन पैसा सीमित। इसलिए जरूरी है कि खर्च कभी भी आमदनी से अधिक न करें और पति-पत्नी बचत जरूर करें ताकि आड़े वक्त में परिवार की जरूरतें पूरी करने में आसानी हो।

बॉक्स :
अगर मौजूदा काम में आपकी बुनियादी जरूरतें पूरी न हो रही हों तो कहीं और काम तलाशें ताकि किसी पर बोझ न बनें। अपने पैसे को ज्यादा महत्व देकर पार्टनर की पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ें। सुखी भविष्य के लिए बचत करना जरूरी है पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि आप पाई-पाई का हिसाब मांगें। जिंदगी में छोटी-छोटी खुशियां भी निहायत जरूरी हैं। पैसे को लेकर आक्रामक रवैया ज्यादातर खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए इससे बचें।

हावी न होने दें तनाव को (Don't Be Tensed)


डीके मिश्र

दांपत्य जीवन में संंबंधों को लेकर कई बार पति-पत्नी पशोपेश की स्थिति में रहते हैं। खासतौर से जब बच्चे के बड़े होने पर यह स्थिति उठ खड़ी होती है। ऐसा संयुक्त परिवार में रहने और महानगरीय जीवन शैली को बढ़ावा मिलने की वजह से स्पेस के अभाव में होता है। अधिकांश मामलों में यही वजह रिश्तों में खटास को जन्म देती है। शरीरिक संबंधों में कमी न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक तथा भावनात्मक रूप से भी पति-पत्नी को अलग करती है। 

हालांकि इस तरह की बातें तर्कसंगत नहीं लगती। ऐसा इसलिए कि मियां-बीवी के संबंधों में समय के अभाव को लोग आसानी से हजम नहीं कर पाते, लेकिन आजकल ये बात हकीकत में है। फिर भी आप चाहें तो समय निकाल सकते हैं। कई बार ऐसा होता है जब आप बिल्कुल अकेले होते हैं जैसे बच्चों के  स्कूल जाने के बाद, बच्चों के ट्यूशन जाने के बाद, बच्चों के सोने के बाद, सुबह के वक्त आदि जब आप खाली समय का सदुपयोग समय के अभाव को दूर कर सकते हैं। 

नव न्यूरो क्लिनिक के डा. विकास सैनी कहते हैं, सबसे ज्यादा अहमियत यह है कि आप अपने साथी को या उसकी भावनाओं का कितना कद्र करते हैं। इन बातों के लिए समय निकाला नहीं जाता है अगर आप तवज्जों देंगे तो अपने आप निकल आता है। जैसे बहुत स्त्रियां बच्चों को दिन में नहीं सुलाती, जिससे बच्चे जल्दी सो जाएं तथा उन्हें अपने पति के साथ समय बिताने को अवसर मिले। जब आपकी शादी की वर्षगांठ होती है तब भी आप अपने उस व्यस्त जीवन में से एक दूसरे के लिए समय निकाल ही लेते हैं वो सिर्फ आपके जोश, प्यार और इच्छाशक्ति की वजह से ही होता है। अगर वही इच्छा आप रोज न कर हफ्ते-दस दिन में भी दिखा देते हैं तो आपके साथी को अच्छा लगता है। 

व्यस्तता हर ईंसान के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है चाहे वो स्त्री हो या पुरुष। लेकिन आप व्यस्तता की दुहाई देकर अपने दांपत्य जीवन से मुंह नहीं मोड़ सकते। चाहे इंसान कितना भी थका हुआ क्यों नहीं हो साथी की भावनाओं की तरफ भी ध्यान देना ही चाहिए। यह  सब आप दोनों की आपसी अंडरस्टैंडिंग पर निर्भर करती है कि आप कितने या किस समय को उपयुक्त मानते हैं। 
कहते हैं कि इंसान को अपना अतीत कभी नहीं भूलना चाहिए ताकि लोग उसे बदला हुआ न कहने लगे। इसी तरह अगर आप अपने दांपत्य जीवन के शुरुआती दिनों की बातों को अपने साथी के साथ याद करें तो शायद जीवन में नीरसता या बोरियत नहीं आएगी। 

सुखद दांपत्य जीवन का मतलब सिर्फ शारीरिक संबंधों से नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के साथ सुखद अहसास से होता है। अगर आपके प्यार भरे मजाक या प्यार भरी छेड़छाड़ आपके दिन का हिस्सा है तो  संबंधों में प्रगाढ़ता आती है तथा तनाव भी आपके संबंधों से दूर रहता है। आजकल रिश्तों में खटास आने का कारण सबसे महत्वपूर्ण  कारण यही तनाव होता है। इसलिए कोशिश होनी चाहिए की तनाव आपके संबंधों पर हावी न होने पाए। 

तो समझिये सबकुछ ठीक नहीं (All Not Good)


पं: महेश शर्मा

शादी जैसे पवित्रतम बंधन की नींव हमेशा प्यार, विश्वास, देखभाल और आदर पर टिकी होती है। अगर इनमें से कोई भी एक चीज गायब है तो समझिए कुछ गलत जरूर है और सही करने की तत्‍काल जरूरत हैा

कई बार रिश्तों में खटास केवल इसीलिए आ जाती है कि दोनों मिल-बैठ कर कुछ मिनट भी बतियाते तक नहीं। बेहतरीन पार्टनर बनने का कोई सटीक नुस्खा तो अभी ईजाद नहीं हो पाया है पर हल्की-फुल्की बातचीत दिमाग को प्रेशर से मुक्त जरूर कर देती है।
रिश्तों में गर्माहट बनाए रखने और नीरस होने से बचाने के कुछ मामूली से तरीके जरूर हैं जो  आपको एकदूसरे की नजर में ‘नंबर वन’ जीवन साथी बना सकते हैं। एक-दूसरे के प्रति कमिटमेंट बेहद जरूरी है। अगर पति-पत्नी अपने रिश्ते के संबंध में साझा मूल्य और लक्ष्य की ओर बढ़ें तो तमाम नीरस और तनाव भरे क्षण चुटकियों में दूर भगाये जा सकते हैंा आपसी विचारों और भावनाओं को साझा करें, एकदूसरे की जरूरतों को समझें और आदरभाव बनाए रखें।

प्रेमपूर्ण उत्साहजनक तरीके से जीवन भर किसी का साथ निभा पाना कोई हंसी-खेल नहीं है। दांपत्य को हमेशा उकताहट और नीरसता ही नहीं तबाह करती, बल्कि कई दफा रिश्तों में गर्माहट रखने में ही पिछड़ जाते हैं हम। बेहतरीन जीवनसाथी साबित होने के लिए जरूरी नहीं कि दोनों  के शौक एक जैसे हों या पसंद-नापसंद एक हो। पर अगर दांपत्य जीवन को सुखी और लंबा बनाए रखने के प्रति आप प्रतिबद्ध हैं एक-दूसरे को आजादी देने की पूरी गुंजाइश रखते हैं तो मतभेदों के बावजूद बीच का रास्ता निकल ही आता है। रिश्ते को बेहतर तरह से निभाने का मूल मंत्र है, उस पर सौ प्रतिशत विश्वास करना। किसी तरह का भय या शक दिल में जहां रखा आपने, समझिए प्रेम से दूर कर रहे हैं खुद को। विश्वास टूटने के भय से पहले ही उस पर शंकालू निगाह रखना, आपको कमजोर करता जाता है। प्रेम तो छूटता ही है, जो चीजें आपके पास होनी थीं, वे भी दूर होती जाती हैं।

जिसे आप प्यार करते हैं, उसे संपूर्णता के साथ स्वीकारें। उसकी अच्छाइयों को अपना लेना और कमियों का चुन-चुन कर सुबह-शाम गिनाते फिरना, आपके प्यार के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। जो है, जैसा है, उसको भर दीजिए प्यार से। संपूर्णता में प्यार करें। कमियों को कमियों की तरह लेना ही छोड़ दें। क्योंकि कोई भी परफेक्ट नहीं हो सकता। कुछ कमियां तो आपमें भी होंगी। बहस के दौरान आप एक-दूसरे का तर्क नहीं सुनते। हमेशा दूसरा तर्क तैयार रखते हैं। पर बहस के दौरान धैर्य बनाए रखना, समझदारी से काम लेना और एक-दूसरे के प्रति सद्भाव बनाए रखना जरूरी है। मत भूलिए कि नकारात्मक मुद्दों पर भी स्वस्थ तरीके से बात हो सकती है।

बात चाहे प्यार की हो या उसके काम की, जितना हो सके, उसका उत्साह बढ़ाइए। यह कभी नहीं मानकर बैठ जाइए कि प्रोत्साहन की उसे जरूरत नहीं, क्योंकि हर किसी को बूस्ट-अप करना नहीं आता। और कोई कितना भी कहे पर हर किसी को तारीफ भाती है। यह बहुत जरूरी है, तो बस शुरू हो जाइए।

सम्मान देने से ही मिलता है। आप अपने जीवन साथी का सम्मान करेंगे तभी दूसरे भी उसे सम्मानित नजरों से देखेंगे। यदि आपने ही उसके बारे में अनाप-शनाप बोलना शुरू कर दिया तो दूसरों को कैसे रोकेंगे। अपनी नाराजगी या नापसंद जरूर बताएं उसे। पर यह ख्याल रखें, कि उसका सम्मान किसी भी तरह दुखे नहीं।

यौन नजदीकी और रोमांस किसी भी दांपत्य जीवन का ऑक्सीजन है। कई बार हम रिश्तों में बुरा वक्त गुजार रहे हों तो हम बेहद थकेऔर दुखी महसूस करते हैं। अपनी व्यस्त जिंदगी में इस संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं। अचानक देखेंगे कि आपसे शारीरिक संपर्क की इच्छा कम होने लगी है। कितनी भी अपनी मर्जी चलाने की आदत हो आपकी, बिना रूके या सोचे हर छोटी-बड़ी बात पर उनकी भी सलाह लें। आपको यह पता भी हो कि अमुक मामले में उनका रिएक्शन क्या होगा तो भी आपकी यह जिम्मेदारी बनती है कि आप उनसे पूछे जरूर। फिर अपने तर्क देकर आप वही करें जो आपकी मर्जी है, पर थोपें नहीं कुछ।

आप कुछ भी क्यों न करते हों, कुछ समय एक-दूसरे को जरूर दें। साथ में बैठ कर टीवी देख लेना, एक साथ डिनर करना या एक ही बिस्तर पर सो लेने से भावनात्मक नजदीकियां नहीं पनपती। कई रिश्तों में खटास सिर्फ इसीलिए आ जाती है कि वे मिल-बैठ कर कुछ मिनट बतियाते नहीं। दोस्तों/रिश्तेदारों की बुराई हो या दफ्तर की समस्या हल्का-फुल्का बांटने से दिमाग का प्रेशर भी तो कम होता है। 

इसलिए जिंदगी में रिश्ते बनाने से ज्यादा कठिन रिश्ते निभाना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के मन को जानना आसान नहीं है। रिश्ते में चुप्पी ठीक नहीं है। आप सोच रहे हैं कि काम के बोझ से साथी आपसे ज्यादा बात नहीं करता। लेकिन साथी कम बात कर रहा है या चुप्पी साधे हुए है तो यह ब्रेक-अप के संकेत हो सकते हैं। 

बॉक्‍स

जहां तक हो सके छोटी-छोटी बातों को नजर अंदाज करें। साथ ही जिस बात से आपके साथी को गुस्सा आता है उस काम को न करने में ही भलाई है। अगर कोई पुरुष चाहे वह दुनिया का सबसे विनम्र और स्वीट व्यक्ति हो, बहस के बाद सॉरी नहीं कहेगा। रिश्तों मेंअहम को बीच में न लाएं। यदि आपका साथी आपसे बात नहीं कर रहा तो आप अपनी तरफ से पहल करें। आपकी बढ़ाया एक कदम आपके रिश्तों को नया जीवन दे सकता है।

Saturday, September 3, 2011

मेजबान भी करेंगे सम्मान

डीके मिश्र
भारतीय समाज में अतिथि देवो भवः की परंपरा हमेशा से रही है। ये बात सच है कि किसी का मेहमान बनने में जो मजा है वह किसी और चीज में नहीं। पर किसी का मेहमान बनना अपने साथ कुछ जिम्मेदारियां भी लेकर आता है।

आज से 15 से 20 वर्श पूर्व तक भी स्थितियां कुछ ठीक थीं। बच्चे क्या, बड़े भी छुट्टियों का इंतजार बेसब्री से किया करते थे। कोई दादी-नानी के घर जाने के सपने संजोता था, तो कोई अपने दोस्तों की स्वागत की तैयारियों में जुटा रहता था। पर अब बच्चों के लिए छुट्टियों का मतलब है ढ़ेर सारा होमवर्क और तमाम तरह के प्रोजेक्ट्स। इन होमवक्र्स में बच्चों से ज्यादा मेहनत उनके पैरेंट्स को करनी पड़ती है।
इसलिए छुट्टियां मनाने के लिए किसी के घर जाने या किसी को अपने घर बुलाने से हर कोई कतराता है। मौजूदा दौर में पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना आम बात है। ऐसे में मेहमान को बहुत ज्यादा वक्त दे पाना किसी के लिए भी संभव नहीं रहा। ऐसे में अगर आप किसी के मेहमान बनें तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

मिलकर बनाएं प्लान

एक कहावत है कि अतिथि वह होता है, जिसके आने की कोई निश्चित तिथि नहीं होती। वह कभी भी किसी भी समय आ सकता है। किसी निश्चित समय में न बंधे होने के कारण ही उसे अतिथि कहते हैं। लेकिन मौजूदा दौर में अतिथि की इस परिभाशा को बदलने की जरूरत है। अगर आप किसी के घर मेहमान बनकर जाने के मूड में है तो पहले अपने मेजबान के प्लान के बारे में पता कर लें। ऐसा न हो कि अपनी मौज मस्ती के चक्कर में आप किसी दूसरे का सारा प्लान चैपट कर दें। बेहतर तो यही होगा कि जिस रिश्तेदार या दोस्त के यहां आप छुट्टियां बिताने जाना चाहती हैं, उन्हें केवल सूचित करने की जगह उनके साथ मिलकर छुट्टियों की प्लानिंग करें।

दें सही जानकारी

अगर आप अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त के यहां छुट्टियां बिताने जा रही हैं तो उन्हें अपने कार्यक्रम की सही जानकारी दें। आपका प्रोग्राम कितने दिनों का है ? आप कितने सदस्य हैं? आप कब पहुंच रहे हैं? आपकी ट?ेन या फ्लाइट का क्या समय है? सब जानकारी अपने मेजबान को जरूर दें ताकि वह सहजता से आपके स्वागत के लिए खुद को तैयार कर सके।

मेजबान की दिनचर्या में न बनें बाधा

हर किसी की दिनचर्या व जीवनशैली एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग सुबह जल्दी उठना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग रात देर तक जागना। जरूरी नहीं कि आप और आपके मेजबान की जीवनशैली एक जैसी ही हो। बेहतर यही होगा कि आप अपनी जीवनशैली के गुणगान गाने और उसे उन पर लादने की जगह उनके रहन सहन के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करें।

बेवजह टीका टिप्पणी नहीं

कुछ लोगों को आदत होती है हर चीज में गलती ढूंढने की। अगर आप किसी के घर मेहमान बन कर जा रही हैं तो इस तरह की किसी भी आदतों से गुरेज करना आपके लिए अच्छा हेागा। दूसरे के घर जाकर उनकी हर चीज में मीन मेख निकालने से लोग आपसे जल्दी से उकता जाएंगे।

न दें प्राइवेसी में दखल

किसी के घर जाकर उसकी निजी जिंदगी में दखल देना किसी भी मेहमान को शोभा नहीं देता है। अगर आप किसी के मेहमान हैं, तो अपने मेजबान के निजी जीवन में ताकझांक करने से बचें। संबंध कितने भी निकटतम क्यों न हों, निजी जीवन में हस्तक्शेप किसी को भी पसंद नहीं होगा।

शुक्रिया है अनमोल शब्द

शुक्रिया एक ऐसा शब्द है जो अनमोल है। जब भी आप अपने मेजबान का घर छोडं तो शुक्रिया कहकर उसका आभार प्रकट करना न भूलें। यह शब्द आपके मेजबान को हमेशा याद रहेंगे। ये कुछ ऐसी बातें हैं जिनका ध्यान रखना आज हर किसी के लिए जरूरी है हो गया है।





जाने भी दो यारों

डीके मिश्र
बदले की भावना एकदम आम बात है, लेकिन बदला लेना बेहद नकारात्मक विशय है। यह भाव इस हद तक नकारात्मक है कि इससे पीडि़त व्यक्ति को डिप्रेशन तक हो सकता है। जिंदगी में ऐसे बातों को भूल जाना ही अच्छा रहता है। ऐसा नहीं करने पर यह कभी भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है।

जहां बात प्रेम की हो और यह दांपत्य प्रेम से संबंधित हो तो बदले की भावना किसी भी सूरत में नहीं रखनी चाहिए। बचपन में नैतिक शिक्शा के पाठों में यह बात हम सभी को खूब सिखाई गई है। जहां तक बात व्यावहारिक जिंदगी की है शायद ही कोई इस भाव से बच सके।

एक शोध की मानें तो इंसान को दूसरों के बुरे बर्ताव के लिए उन्हें सजा देकर खुशी मिलती है। इस खुशी की संभावना के बारे में सोचते ही हम बदला लेने के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं। अमेरिकन इसे एल्टूसिक पनिशमेंट कहते हैं। रिसर्च के अनुसार यदि एक इंसान के साथ धोखा होता है तो जाहिर है उसे बुरा लगता है। लेकिन अगर उसके साथ धोखा करने वाले को सजा न मिले तो उसे और भी ज्यादा बुरा लगता है।

साइकोलाॅजिस्ट डा. सीमा शर्मा कहती हैं, बदले की भावना स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन इसकी हैंडलिंग सही तरीके से किया जाना ज्यादा जरूरी है। मसलन अगर आपके आॅफिस में कोई आपके खिलाफ साजिश कर रहा है तो आप उसकी हैंडलिंग दो तरह से करते हैं। या तो आप उस व्यक्ति कि खिलाफ खुद साजिश करने में अपना समय बर्बाद कर सकते हैं या फिर काॅन्फिडेंस ओर सतर्कता के साथ आगे बढ़ते हुए अपने काम को और बेहतर बना सकते हैं।

बदले की भावना प्यार में धोखे के मामले में भी काफी ज्यादा देखी जाती है। ऐसे कई केस जीवन में सामने आते हैं जहां लव अफेयर्स में धोखा और उसके बाद बदले की भावना सामने आती है। ऐसे मामलों में सबकुछ छोड़कर आगे बढ़ना अच्छा हैं। ऐसा नहीं है कि धोखा देने वाले ने अकेले सब कुछ कर लिया हो। इसमें कहीं न कहीं धोखा खाने वाले की भी गलती होती है।

किसी न किसी वाक्ये में उसे जरूर पता चला होगा कि सामने वाला उसके लिए वफादार नहीं है। जानने के बाद भी यदि उसने नजरअंदाज किया तो इसमें उसकी भी उतनी ही गलती है, जितनी दूसरे की। इसके अलावा जिंदगी में हर चीज जिसे आप चाहें, आपको मिल नहीं सकती। यहां दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने की भी जरूरत है। उसे समझने की जरूरत है।

कैसे बचाए खुद को इस भाव से
- बदले का भाव क्यों आता है इसे जानने की कोशिश करें।
-कभी भी ऐसा महसूस हो तो खुद को सबसे पहले शांत करें।
- समस्या क्या है उसे जाने और उसके समाधान पर जोर दें।
- ये भी देखें कि पूरे वाक्ये में खुद की गलती कहां है।
- फिर उसी के अनुरूप अपना रोल तय करें।

प्यार में न हो दरार (Let love be not break)

प. महेश शर्मा
छोटी-छोटी बातें प्यार भरे रिश्ते को टूटने की कगार तक पहुंचा देते हैं। समझदारी इसी में है कि रिश्ते को तोड़ने वाली चीजों से आप दोनों दूर रहें।

तकरार जरूरी नहीं है कि बड़ी-बड़ी बातों को लेकर ही है। लेकिन संबंधों को तोड़ने वाला तकरार छोटी छोटी बातों से ही शुरू होती है। कई बार तो केवल इस बात पर मामला इतना बिगड़ जाता है कि पार्टी में पत्नी अपने पति को एक बेहद ही खूबसूरत और के साथ बैठकर खिलखिलाते देख पत्नी को इतनी इश्र्या होती है कि वह उदास सी एक ओर बैठ जाती है।

पति-पत्नी के बीच यही इश्र्या दरार डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका कारण चाहे जो भी हो पर उसका परिणाम न सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

पति का दूसरी औरतों में लोकप्रिय होना या अपने शानदार व्यक्तित्व के कारण आकर्शण का केन्द्र बनना पत्नी के अंदर स्मार्ट या काबिल हो तो उसका ईश्र्या करना स्वाभाविक है, पर अगर वह उससे ज्यादा कमाती है तो भी अक्सर पति को अपनी पत्नी की कामयाबी परेशान करती रहती है।

मनोवैज्ञानिक डा. विकास सैनी कहते हैं, मानसिक विकृति का एक रूप बेशक हो पर वास्तव में यह एक तरह की असुरक्शा की भावना होती है, जिस पर कई तरह से प्रतिक्रिया की जाती है। यह असुरक्शा साथी के अधिक सुंदर, योग्य, ज्यादा कमाने या सबका प्रिय होने की वजह से उत्पन्न हो सकती है। हालांकि जिस साथी से यह जलन होती है, उसके मन में किसी तरह का वर्चस्व होने का भाव या साथी को हीन जताने की भावना नहीं होती है। फिर भी दूसरा साथी अपने आप मन में अनेक कहानियां बुन लेता है। फिर पता नहीं चल पाता कि कब ईश्या का फन सिर उठाए खड़ा हो जाए, क्योंकि किन्हीं खास स्थितियों से यह मनोस्थिति बंधी नहीं होती है।

क्या है ईश्या
प्ति-पत्नी के बीच ईश्या का मुख्य कारण है औरतों का बढ़ता पावर स्टेटस, उनकी अपनी एक अलग पहचान, जिसका संबंध सिर्फ उनसे होता है। साथ ही हर स्तर पर बढ़ता एक्सपोजर जो काम करने, सोशल नेटवर्क साइटस पर रहने से लगातार बढ़ रहा है। इससे वह दूसरे पुरुशों के संपर्क में आती है, जिससे पति अंदर अनजाने में ही एक ईश्र्या की भावना पनपने लगती है। साथ ही पर्याप्त समय न बिताने व कम्युनिकेशन न होने के कारण भी अपने साथी के सामाजिक जीवन को स्वीकार करने में दिक्कत आने से ईश्र्या की भावना पनपने लगती है। बेहतर होगा कि साथी को अपना प्यार अवश्य प्रदर्शित करें और अपने अंदर पुरानी बातों को लेकर उपजी असुरक्शा को वर्तमान पर हावी न होनें दें।

ऐसे दूर भगाएं ईश्या

बेहतर यही होगा कि अपने मन में भ्रांतियां पालने व अपने साथी को अपने व्यवहार से आहत करने के बजाय खुलकर उससे मन की बात शेयर करें। ध्यान रखें जलन पर आप पर हावी न हो। अगर आपका साथी अचानक राह में चलते चलते किसी अजनबी को देखने लगे तो किसी भी तरह की शंका मन में न लाएं। उस पर विश्वास करें और बेकार की बातों पर ध्यान देने के बजाय अन्य महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान लगाएं। अगर कोई तीसरा व्यक्ति रिश्ते के लिए खतरा बन रहा हो तो अपने साथी से अपनी असुरक्शाओं के बारे में बात करें ताकि उलझनें बढ़ने के बजाय समय रहते ही सुलझ जाए।

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