Tuesday, May 8, 2012

बाल रहे खूबसूरत हरदम


पं. महेश शर्मा

बालों का स्वास्थ्य आपकी सेहत पर निर्भर करता है। अच्छे बालों पर ही कोई भी हेयर स्टाइल सूट करता है।

बालों से जुड.ी आये दिन कोई न कोई समस्या आती ही रहती है, लेकिन इन समस्याओं को अगर लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह बिगड.ा रूप ले लेती हैं। अगर आप अपने बालों से प्यार करती हैं, तो छोटी-छोटी समस्याओं से बचने का उपाय करना ही आपके लिए बेहतर है।

बालों में पिफ्रज दूर करने के लिए लिए गीले बालों में एंअी फ्रिज सीरम लगाएं। इस तरह ब्लो ड?ाई से खराबा हो चुके बालों को नमी मिलेगी। और उनमें चमक भी आएगी।

देखभाल

बालों के स्टाइल से अधिक जरूरी है उनकी देखभाल। इसलिए अपने आहार पर भी ध्यान दें। आहार में जिंक और आयरन अच्छी मात्रा में शामिल करें।

हेयर सीरम लगाएं

हेयर सीरम का इस्तेमाल करें। यह बालों को ओवर हीटिंग से बचाता है। हेयर कर्लिंग आयरन का प्रयोग करने से पहले अगर बालों में सीरम लगा लिया जाए तो बाल रुखे नहीं होते। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सीरम सिर की त्वचा या बालों की जड.ो पर न लगाएं।

आॅयल मसाज करें

लंबे और सीधे बालों की देखभाल के लिए सप्ताह में एक से दो बार आॅयल मसाज करें। अपना शैंपू समय समय पर बदलती रहें, ताकि बालों को जरूरी पोषण मिलता रहे। बेहद रुखे बालों के लिए हीट प्रोटेक्टिव क्रीम का प्रयोग करें। इसके बाद ही ब्लो ड?ाई करें।

परवरिश बच्चों का खेल नहीं है

पं. महेश शर्मा
बहुत तेजी से बदी रही है आज के बच्चों की दुनिया। ऐसे में उनके साथ हमारा बदलना भी वक्त की जरूरत बन चुका है। अ बवह दौर नहीं जब बडे. सिर्फ उपदेषक की भूमिका में होते थे। आज के अभिभावक वक्त के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं। उन्हें बहुत कुछ सीखने और समझने की जरूरत महसूस हो रही है। वाकई आज के माता पिता के लिए परवरिष बच्चों का खेल नहीं रह गया है।

आज की अति व्यस्त जीवनषैली का प्रभाव बच्चों के व्यवहार में भी देखने को मिलता है। वे सब कुछ बहुत जल्दी सीखना चाहाते हैं और हर काम के लिए षार्टकट रास्ते अपनाते हैं।

अगर आप उनकी बोलचाल, एसएमएस और चैटिंग की भाशा पर गौर करें तो यह समझना आसान हो जाएगा कि आज के बच्चे किस तरह कम से कम समय में और बिना अतिरिक्त मेहनत के अपना काम चलाना चाहते हैं। एक हद तक इसमें कोई बुराई नहीं है, पर उनकी यह जल्दबाजी और अधीरता उनके पूरे व्यक्तित्व में दिखाई देती है।

पहले बच्चों को यह सिखाया जाता था कि एक वक्त में एक ही काम करना चाहिए, पर आज मल्टीटास्किंग कल्चर को बढ.ावा दिया जा रहा है, जिसमें बच्चे एक साथ कई काम कर रहे होते हैं। यह उनके तेज दिमाग की निषानी जरूर है, पर इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि अब उनकी एकाग्रता में कमी आ रही है। वे सब कुछ थोड.ा थोड.ा जानते हैं पर किसी भी विशय की उन्हें पूरी और गहरी जानकानी नहीं है।

आज दौर में आप को भी बच्चों को कान में ईयरफोन लगाकर पढ.ते हुए या होमवर्क करते दिखते होंगे तो बहुत ताज्जुब होता है। मेरा तो मानना है कि उनमें जरा भी धैर्य नहीं है और वे हर काम जल्दी में निबटाना चाहते हैं। आज के बच्चे अच्छे स्रोता नहीं है। अगर उन्हें कोई बात बताई जाती है तो वे अपनी बाॅडी लैंग्वेज से यह जाहिर करते है कि उन्हें पहले से ही सब कुछ मालूम है और वे बड.ों की कोई भी बात सुनने में जरा सी भी दिलचस्पी नहीं है। इससे उनकी चेतना का सही और संतुलित विकास नहीं हो पा रहा है। उनके पास सूचनाएं तो बहुत हैं पर उनमें धैर्य विकसित नहीं हो पा रहा है, जिससे वे अच्छे बुरे की पहचान करते हुए सही निर्णय ले सकें।

दूसरी तरफ बच्चों के लिए पीयर प्रेषर यानी दोस्तों का दबाव सबसे बड.ा हौवा है। अगर वह अपने दोस्त की बर्थ डे पार्टी में ढंग से तैयार होकर नहीं गए तो उन्हें डर रहता है कि कहीं सभ्भी लोग मेरा मजाक न उडएं।

इसलिए जरूरत इस बात की है कि आज के बच्चों का बौदिृधक विकास पर ध्यान दिया जाए ताकि वे सही स्थित से अवगत हो सकें

सुंदर दिखाएं

पं. महेश शर्मा

षादी का मौसम फिर से षुरू होने वाला है। सभी चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा सुंदर दिखूं। लोगों की नजरें कहीं टिके तो उन्हीं पर आकर। उुपर से भीनी-भीनी सी ठंड की सिहरन महिलाओं की सुंदरता को चार चांद लगाने को तैयार है।

साड़ी ऐसा पहनावा है, जिसमें हर उम्र की महिलाओं की सुंदरता को निखारने की क्षमता है। हर कद काठी को यह ग्लैमरस और आकर्शक अंदाज दे सकता है। फैषन आते है और चले जाते है पर साड़ी की सुंदरता न तो कमी आई है और न ही इसका क्रेज कम होने वाला है। रैंप से लेकर रूम तक साड़ी की सुंदरता आज भी बरकरार है। पामेला एंडरसन को ही देख लीजिए। पष्चिमी सभ्यता की यह महिला भारत आई तो साड़ी में। बिग बास घर के षिफान साड़ी के बीच उसकी सुंदरता को देख भला कौन नहीं इतरा सकता है।

वैसे भी धारावाहिक के इस दौर में जहां महिलाएं टीवी से चिपकी होती हैं साडि़यां फैषन स्टेटमेंट है। यह तो अब हाट, ग्लैमरस और सबसे ज्यादा कामुक दिखने का ऐसा पहनावा बन गया है जिसमें सबसे ज्यादा सुंदर दिखा जा सकता है। और अगर सलीके से साड़ी पहनना जानती है तो लोग भी इसकी तारीफ करते हैं।

ऐसे में आप भी साड़ी पहनने का अंदाज बदल दे ंतो भारतीय परिधान में हाॅट व ग्लैमरस लग सकती हैं। साड़ी ही एक ऐसा परिधान है, जिसे पहनने के अंदाज से मोटे से पतला व पतले से मोटा लगा जा सकता है। बिना टमी टाइटनिंग कराए यह आपके षरीर की कुछ कमियों को छुपाने में भी मददगार

सिल्की ब्यूटी

रिच लुक पाने के लिए सिल्क की साडि़यां सबसे बेस्ट होती हैं। इसे आप आॅफिस और षादी जैसे अवसरों पर भी आसानी से पहन सकती हैं; आॅफिस में पहनने के लिए केवल बाॅर्डर वाली सिल्क की साडि़यां खरीदें। जबकि षादी व अन्य सांस्क2तिक कार्यक्रमों में षिरकत करने के लिए डिजाइनदार और थोडा चटक होना जरूरी है। 

सदाबहार सूती 

काटन साड़ी सदाबहार श्रेणी में आती है। यह आॅफिस में पहनने के लिए एक बेस्ट परिधान है। यह आपको एक एलिगेंट लुक देगी। काॅटन की साड़ी पहनने की एक जरूरी षर्त यह है कि आपको इस साड़ी को पहनने का तरीका आना चाहिए। इसके सहारे आप षरीर के हर अंग को उभारा जा सकता हैं एवं उसे सुंदर दिखाया जा सकता है। यह क्षमता केवल साड़ी में और किसी भी पहनावे में नहीं। बनारसी साड1ी

हालांकि बनारसी साड़ी आजकल प्रचलन में नहीं है, लेकिन क्लासिकल लुक देने में यह आज भी काफी बेहतर है। हां इतना जरूर ख्याल रखें की बनारसी साड़ी पहनने जा रही हैं तो गहरे रंगों में ही पहनें। षुभ अवसरों के लिए बनारसी और कांजीवरम की साडि़यां खरीदना बेहतर रहता है। 

स्लिम ऐंड टम बाडी

यदि आप पतली हैं तो बड़े-बड़े फृलाॅवर प्रिंट की साडि़यां आप पर खूब फबेंगी। इससे आपका षरीर भरा-भरा लगेगा। आपका व्यक्तित्व आकर्शक नजर आएगा। ज्योमेटि?क प्रिंटृस भी आपके लिए बेहतर सिलेक्षन साबित होंगे। जार्जेट, षिफाॅन या सिल्क की साडि़यां आपके आकर्शक व्यक्तित्व के लिए नितांत आवष्यक है।

फैट बाडी

मोटापा महिलाओं की एक आम समस्या है। मोटापे की वजह से टमी को लेकर महिलाएं परेषान रहती हैं। फैटी लेडी को कपडों के चर पर गौर फरमाना सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर आपका कद छोटा व वजन ज्यादा है तो आप छोटे फृवालर प्रिंट वाली साडि़यों का ही चयन करें।

इसके अलावा नित नए फैषनेबल स्टाइल साड़ी में आ रहे हैं। ऐसे में बहुत महंगी साड़ी न खरीदते हुए भी आप थोड़ी सी सूझबूझ से कम कीमत में अपनी साडि़यों को घर पर ही सजा कर आप न्यू लुक दे सकती हैं, जो आपकी सुंदरता को चार चांद लगा सकते हैं।

संग संग हम दम

पं. महेश शर्मा

शादी को लेकर आजके युवा काफी कंषस हो गए हैं। वह अब सुंदर और केयर करने के साथ जिंदगी के हर मोड़ पर साझीदार बन सकने वाली पत्नी की चाहत रखते हैं। वह समझदार और आर्थिक मामलों में सहयोगी होने की क्षमता रखने वाली हो। ठीक उसी तरह लड़कियों की पसंद में भी बदलाव आया है। लड़कियों को ऐसे लड़के पसंद हैं, जो योग्य हो, सुंदर हो और जमाने के साथ चलने वाला।

यानी षादी केवल रिष्तों को जोड़ने का खेल नहीं, बल्कि सही मायनों में कंधे से कंधे मिलाकर जिंदगी जीने का माध्यम हो गया है। हमसफर षब्द को सही मायने में आज के युवा सही अर्थ दे पा रहे हैं। खासतौर से करिअर के मुदृदे पर समझौता करना उन्हें स्वीकार नहीं है; फिर बात षादी में बंधने की हो या फिर किसी और की इससे कोई फर्क नहीं पडता।

महानगर से लेकर कस्बाई क्षे़त्रों की लड़कियां भी यह मानने लगी हैं कि षादी से पहले करिअर को महत्व देना जरूरी है। अभिभावकों चाहे उन पर कितना दबाव बना लें, लेकिन वे इसे नहीं मानते। ऐसे में अभिभावकों के लिए बेहतर यही होता है कि समय के साथ चलें और युवाओं की सोच के साथ तालमेल बैठाएं।

गीता में भी कहा गया है कि बीता हुआ कल और आने वाले कल में क्या घटित होगा यह तय करना आपके वष में नहीं है। न ही क्या होने वाला है वो आपके सोचने से तय होने वाला है। यह तो कोई और तय करता है। इसकी चिंता आपको करने की जरूरत नहीं है। अगर आप इसकी चिंता करते हैं तो व्यर्थ ही है।

 आपके हिस्से में जो है वह सिर्फ आज है। आज को भरपूर जीने की कोषिष करने में ही समझदारी है। ज्यादातर लोग अपने संबंधों को जोड़ने और बनाने में इसी वजह से विफल साबित होते हैं। वे समय की अविरल धारा को समझ नहीं पाते। और जब आप उसे ढंग से समझेंगे ही नहीं तो सफलता मिलना भी संभव नहीं हो पाता। यह बात अभिभावकों को समझने की जरूरत है। इस मामले में अधिकांष अभिभावक इन्हीं बातों के षिकार हैं।

ऐसे अभिभावक जो समंजस्य बिठकार अरेंज मैरिज कर लेते हैं, वो बहुत हद तक सही भी करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि युवाओं को सबकुछ अपनी मर्जी से करने दें। उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हुए जहां तक संभव हो परंपरा में व्याप्त अच्छाईयों को भी जारी रखा जा सकता है। और यह काम युवाओं को मानसिक रूप से साथ लेकर बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

तरीके से होने लगा है प्रापर्टी का कारोबार

पं. महेश शर्मा 
मेरठ में अब प्रापर्टी लेन-देन का काम व्यवस्थित तरीके से होने लगा है। प्रापर्टी एडवाइजरी एंड कंसलटेंसी नामके इस काम की शुरुआत एक एमबीए युवक ने की है। इसके जरिये लोगों प्रापर्टी की खरीद-बिक्री का काम कानूनी व औपचारिक तरीके से होने लगा है। ऐसा होने से अब खरीददार को इस बात से राहत मिली है कि एक बार प्रापर्टी दिलाने के बाद जब उन्हें परेशानी होने पर वह कंसलटेंसी एजेंसी का सहयोग लेकर अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं।

प्रापर्टी एडवाइजरी के इस व्यवसाय के अन्तर्गत लोगों को अब कई तरह की परेशानियों से राहत मिलने लगी है। ब्रिक्स एंड होम्स रिएल एस्टेट इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के अनुराग गर्ग कहते हैं, अभी तक प्रापर्टी के खरीद बिक्री का काम मेरठ में व्यवस्थित तरीके से नहीं हो पा रहा था। उन्होंने परंपरागत तरीके से होने वाले काम को केवल औपचारिक व कानूनी तरीके से करने का काम शुरू किया है। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि मेरठ में बड़े पैमाने पर रिएल एस्टेट कारोबार होने के बाद भी लोग प्राइवेट बिल्डर पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। 

ऐसा इसलिए कि एक बार किसी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने के बाद प्रोजेक्ट लेट होने पर खरीदार ठगा महसूस करता है। ऐसे में उसे नुकसान उठाना पड़ता है। इस योजना के अन्तर्गत प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों का नुकसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि इस काम को भारत सरकार के रिएल एस्टेट कानूनों के अनुसार अंजाम दिया जा रहा है,जिसके अनुसार शर्तें पूरी नहीं करने पर बिल्डर को नफा नुकसान के लिए जिम्मेदार होंगे। साथ ही उन्हें खरीदार को क्षतिपूर्ति अदा करना पड़ेगा। 

एडवाइजरी एंड कंसलटेंसी वर्क के अन्तर्गत फिलहाल एजेंसियों द्वारा डीएलएफ, ओमैक्स, सुपरटेक, थ्रीसी, ग्रांड इन्फ्रा, अंसल, एरा, आम्रपाली, जेपी, लोधा, यूनिटेक जैसी कंपनियों की प्रापर्टी बेचने का काम किया जा रहा है। ये काम मेरठ  सेंटर से दिल्ली, गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, मोदीनगर, चंडीगढ़, देहरादून, मुम्बई आदि शहरों के लिए हो रहा है। 

इस तरीके से प्रापर्टी की खरीद करने पर सबसे ज्यादा प्रापर्टी में निवेश करने वालों का हित सुरक्षित रहेगा। क्योंकि इसमें डेवलपर अपने प्रोजेक्ट्स को कंसलटैंट्स के माध्यम से बेचेंगे। कंसलटैंट खरीददार और डेवलपर के बीच सेतु का काम करेगा और भविष्य में होने वाली समस्याओं का समाधान भी करवाएगा। 
इस काम को करने वालों का कहना है कि मेरठ व आसपास के क्षेत्र में इस व्यवसाय में काफी ज्यादा स्कोप है।
हां, एक बात और है व्यवस्थित तरीके से काम वही कर पाएगा, जो पढ़ा लिखा हो। 

सही मायने में तो एमबीए, बीटेक, एमटेक करने वालों के लिए यह काम सबसे ज्यादा लाभकारी साबित हो सकता है, क्योंकि ऐसे युवंओं को तकनीकी व काूननी पहलुओं के बारे में सकारात्मक सोच रखते हैं। कानूनी प्रक्रियाओं के तहत काम करने पर उनका व्यवसाय काफी चलेगा। एक युवक बिना किसी ज्यादा दौड़ धूप के प्रतिवर्ष न्यूनतम सेल करने पर भी हायर नौकरी पेशा में शामिल लोगों की तुलना में खुद को ज्यादा बेहतर स्थिति में पा सकता है।

सेहत के हैं ये राजदार

पं. महेश शर्मा 

रुटीन लाइफ में आप हर रोज कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का उपयोग करते हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होते हैं, लेकिन लोगों को यह पता नहीं होता है कि उसका उपयोग वह क्यों करते हैँ?

 गाजर : गाजर के गुणों से सभी वाकिफ हैं। इसे गोल काटने पर यह बिल्कुल मनुष्य की आंख की तरह दिखती है। बीच के हिस्से को ध्यान से देखने पर यह आंख की पुतली की आकृति की तरह नजर आएगी। इसके सेवन से रक्त की कमी को दूर किया जाता है। साथ ही आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद होती है।

टमाटर : यह लाल रंग का होता है और इसमें चार कक्ष होते हैं। मनुष्य के दिल में भी चार कक्ष होते हैं और यह भी लाल होता है। विभिन्न शोधों में बताया गया है कि इसमें लाइकोपीन पाया जाता है। यह दिल के मरीजों के लिए लाभदायक होता है।

अंगूर : यह दिल के आकार में गुच्छे में लटकने वाला फल है। हर अंगूर रक्त कोशिका की तरह दिखता है। इसके सेवन से खून की मात्रा बढ़ती है।

अखरोट : अखरोट के बीच का हिस्सा छोटे से दिमाग की तरह दिखता है। इसकी सिलवटें नियो कारटेक्स की तरह दिखती हैं। नियो कारटेक्स स्तनधारियों के मस्तिष्क का हिस्सा है। यह मस्तिष्क के कार्य के लिए तीन दर्जन से ज्यादा न्यूरान ट्रांसमीटर विकसित करता है। टमाटर के सेवन से शारीरिक और मानसिक विकास अच्छा होता है।

सैलेरी : यह हड्डी की तरह दिखने के साथ उसकी ताकत को बढ़ाने का काम करती है। हड्डी में 30 प्रतिशत सोडियम होता है। इनमें भी यही मात्रा पाई जाती है। अगर आपके खाने में ज्यादा सोडियम नहीं है, तो शरीर की हड्डियों में खिंचाव आ जाता है और यह कमजोर हो जाती हैं। इसके सेवन से हड्डियों की जरूरतें पूरी होती हैं।

एवाकेडो : बैगन और नाशपाती. आकार के हिसाब से यह गर्भ और महिला के गर्भाशय ग्रीवा की तरह दिखते हैं। हाल के शोधों में यह बात निकलकर आई है कि कोई महिला हफ्ते में एक बार एवाकेडो खाती है तो उसका हार्मोस संतुलित रहता है और सरवाइकल कैंसर से बचाव होता है। एक औरत को मां बनने में नौ महीने का समय लगता है। इतना ही समय एवाकेडो को कली से फल पकने तक में लगता है।

अंजीर : यह बीज से भरा फल होता है। पेड़ पर इसके दो फल एक साथ बढ़ते हैं। यह पुरुषों के शुœाणुओं की गतिशीलता के साथ उसकी संख्या को बढ़ाते हैं।

आलू : यह पैंœियाज अग्नाश्य की तरह दिखता है। यह डायबिटिज के मरीजों में ग्लूकोज के स्तर के अनुरूप कार्बोहाइड्रेट बनाता है।

ओलिव जैतून : यह दिखने में अंडाशय की तरह होता है। इसका सेवन भी स्वास्थ्य और अंडाशय के लिए उपयोगी होता है।

संतरा : आम तौर पर खत्र्े फल महिलाओं के स्तन की भांति दिखते हैं। यह वास्तव में स्तनों के स्वास्थ्य के लाभकारी होता है।

प्याज : यह शरीर की कोशिकाओं की तरह दिखता है। हाल ही में शोध में यह बताया गया है कि प्याज शरीर की कोशिकाओं से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालती है। इनको काटने पर आंखों में आंसू आ जाते हैं, जो आंखों की ऊपरी परत एपीथेलियल लेयर को धो देती है। इसका साथी लहसुन भी अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालने का

बना रहे रिश्तों में प्यार

पं. महेश शर्मा 

क्या आपने कभी यूं ही एकांत क्षणों में स्नेह से साथी की बांह पकडी और खुद के भीतर एक

पवित्र सी स्नेह भावना महसूस की। गहरी उदासी भरे पलों में पति ने आपके माथे पर प्यार भरा

एक चुंबन दिया और आपको लगा मानो एक पल में ही सारा तनाव खत्म हो गया। रोते बच्चे को

मां ने प्यार से दुलारा और उसके आंसू थम गए। हॉस्पिटल के बेड पर पडे मरीज की हथेलियों पर

डॉक्टर ने हौले से अपनी हथेलियों का स्पर्श दिया और वह कष्ट में भी मुस्करा उठा।


क्या है स्पर्श


हम सभी स्पर्श की भाषा समझते हैं। अक्सर किसी से मिलते समय हम उससे हाथ मिलाते हैं।

इससे संबंधों में एक गर्मजोशी का एहसास होता है। आमतौर पर किसी से दोबारा मिलने के लिए

हमारा प्रिय वाक्य होता है कीप इन टच। चिज्ञ्ी में संबोधन के बाद सबसे पहले शब्द होते हैं

बडों को चरण स्पर्श और छोटों को स्नेह व प्यार भरा आशीष। हम डॉक्टर से हीलिंग टच के

बारे में बात करते हैं। अपने छोटे बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श में फर्क करना सिखाते हैं।

सार्वजनिक स्थलों पर हम सभी दूसरों से अपेक्षित फासला रखना बेहतर समझते हैं। कोशिश

करते हैं कि गलती से भी किसी को छू न लें। क्योंकि इसका संदेश विपरीत भी जा सकता है। इन

सबके बीच हम एक बेहद बुनियादी सी बात भूल जाते हैं। वह है स्वस्थ मानवीय स्पर्श। समाज

में, परिवार मे, किसी से बातचीत में, हम इस स्पर्श की मक भाषा को व्यक्त करना भूल ही जाते

हैं।


जादू की झप्पी का महत्व

मां का भरपूर स्पर्श पाने वाले बच्चे का विकास अपेक्षाकृत तेज गति से होता है। जबकि ऐसे

बच्चे बीमार एवं कमजोर होते हैं, जिन्हें मां का प्यार नहीं मिल पाता।

स्पर्श महज मनुष्य जाति की ही भावना नहीं है, बेजुबान जानवरों को भी यह भाषा समझ आती

है। शोध तो यहां तक कहते हैं कि जिन पालतू जानवरों को ज्यादा प्यार मिलता है, वे औरों से

ज्यादा स्वस्थ होते हैं।


मानवीय संबंधों में स्पर्श का बहुत महत्व है। दुख के पलों में दोस्त सांत्वना देते हुए कंधे पर

हाथ रखता है और बिना बोले कह देता है मैं हंू न। फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस में यह स्पर्श

मरीजों को जादू की झप्पी देने लगता है।


सांस लेने जितना जरूरी है स्पर्श


आज के युग में जहां लोगों के पास समय की कमी है, स्पर्श का महत्व और बढ गया है। शायद

यही कारण है कि हीलिंग टच थेरेपी की मांग लगातार बढ रही है। पार्लर में फेशियलए स्पा या

बॉडी मसाज कराना हो या रेकीए एक्यूप्रेशर या एक्यूपंचर जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों

से शरीर मन को स्वस्थ रखना होए स्पर्श ही इनके केंद्र में काम करता है। इसलिए वैज्ञानिक

अब स्पर्श को जिंदा रहने के लिए जरूरी मानने लगे हैं।


शब्दों से परे भावनाओं से भरे स्पर्श के बारे में इतना ही कहना काफी है कि जहां शब्द चुक जाते

हैं, स्पर्श बोलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी कमी से न सिर्फ भावनाएं आहत होती

हैं, बल्कि दांपत्य में सेक्स भावनाएं भी कम होने लगती हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी

इसका प्रभाव पडता है।


मानव शरीर त्वचा के सुरक्षित खोल के भीतर समाया हुआ है, जिसमें हर एक इंच में हजारों

स्नायु और संवेदन तंत्रिकाएं मौजूद होती हैं। ये मस्तिष्क को आसपास होने वाली घटनाओं की

सूचना भेजती हैं। मसलन बर्फ पर हाथ रखते ही ठंड का एहसास होना आग पर हथेली पडते ही

त्वचा में जलन का अनुभव होना जैसे तमाम काम स्नायु तंत्र के ही हैं।