Thursday, August 14, 2014
Rishton Ka Sansar Official Blog: Find your Soul Mate with Brahmin Matrimonial Websi...
Rishton Ka Sansar Official Blog: Find your Soul Mate with Brahmin Matrimonial Websi...: If you are from Brahmin community and looking for a perfect match then registering yourself at any Brahmin matrimony website can be a good...
Find your Soul Mate with Brahmin Matrimonial Website
If you are from Brahmin community and looking for a perfect
match then registering yourself at any Brahmin matrimony website can be a good
step for you. There days, community online portals are becoming very useful.
These portals are especially dedicated to community marriages.
Matrimonial sites are integrated with various advance
features and facilities. You can upload you complete information and attractive
photographs after creating an account on any matrimony site. Many website also
provide chat features through which you can also chat from different people and
know about their thoughts. This will help you to know people better and find an
ideal life partner.
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| Rishton Ka Bandhan |
Registering on any
Brahmin matrimonial site is simple. You
just need a computer and an Internet connection to register and access
these
portals. You can easily register yourself at these Brahmin matrimonial sites.
To register you, type the url of the site in the address bar of the
browser and
then click the register link on the home page. Provide the required
information
and complete the registration process. To make your profile more
attention grepping, upload some of your attractive and good quality
photographs. Also
provide complete and true information about you.
There are some special matrimonial sites in Delhi NCR dedicated to Brahmin community. If you are in Delhi NCR or looking your
life partner in this locality then you can register on some these portals.
First you can register as the free member and later you can update your account
as paid member for dedicated services.
Monday, August 11, 2014
Friday, February 21, 2014
विश्वास करे प्यार की डोर को मजबूत
मुश्किल में दें साथ
आदमी जब मुश्किलों से हारकर टूट जाता है, तब प्यार उसकी ऊर्जा बन उसे फिर से जीवित करता है। आपका सच्चा प्यार ऐसे वक्त में भी आपका साथ निभाता है, जब दुनिया आप पर नफरत व आलोचनाओं के तीर बरसाती है। अपने साथी का हौसला आपके कदम जब भी डगमगाएं तो वह फिर से खड़ा होने की हिम्मत व दुनिया का सामना करने की ताकत देता है।
समझदार साथी
यदि आपका साथी समझदार है, तो वो आपकी हर मुश्किलों को हल करके आपका जीवन संवार देगा। समय-समय पर आने वाली दुविधा की स्थिति में आपका साथी ही आपको सही राह दिखा सकता है। समझदार साथी आपकी हर मुश्किलों को चुटकी में हल करने में सक्षम होता है और आपको प्रतिकूल परिस्थितियों से बाहर ले आएगा।
लोगों की बातों पर ध्यान न दें
कहा जाता है कि हमेशा निंदक को अपने साथ रखना चाहिए। ऐसे लोग आपकी बुराई का चिट्ठा आपके सामने खोलकर रख देते हैं । परंतु आज जमाना पूरी तरह से बदल गया है। अब निंदक को बगैर बुलाए ही हर जगह उपलब्ध हो जाते हैं। नए जमाने के ये निंदक आपकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने में एक पल की भी देर नहीं करते हैं। यदि आप इन चापलूसों के चक्कर में आकर अपने सच्चे प्यार से जुदा होते हैं, तो आप बहुत बड़ी मूर्खता करते हैं। इस दुनिया की तो यह रीत ही है कि वो सच्चे प्रेमियों की राह में हमेशा बाधाएं व मुश्किलें पैदा करती है।
Monday, January 20, 2014
रिश्तों को टूटने से पहले सहेज लीजिए
कहते हैं कि जोडि़याँ स्वर्ग में बनती हैं। धरती पर तो इनका मिलन भर होता है। भारतीय संस्कृति में शादी को जन्म-जन्मांतर का साथ माना गया है। शायद इसी बात को हमारे यहीं लोग शब्दशः स्वीकार करते हुए जिंदगी भर सुख-दुख में एक-दूसरे को साथ निभाते चले आएं हैं। इसी वजह से भारत में तलाक की दर अन्य देशों की तुलना में काफी कम थी लेकिन पिछले दो दशकों में यह परिदृश्य काफी बदल गया है।
देश के महानगरों में तलाक के मामले काफी बढ़ रहे हैं। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों के उच्च और मध्यम वर्ग में शादियों का दिन-प्रतिदिन टूटना अब मनोवैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय हो गया है। जहां तलाक को पहले अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता था वहीं अब कई युवा दंपत्ति इसे समस्याओं के समाधान के एकमात्र विकल्प के रूप में देखते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इन दिनों फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी 25 से 35 आयु वर्ग के दंपतियों द्वारा और वो भी शादी के महज 3 साल के भीतर ही दी जा रही है। निश्चय ही रिश्तों का जुड़ना और फिर इस तरह से टूटना सिवाय दर्द के कुछ नहीं देता। जो पति-पत्नी बच्चों के किशोरावस्था तक पहुँचने में यह निर्णय लेते हैं, उनके बच्चों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। अध्ययनों के मुताबिक जो बच्चे माता-पिता के अलगाव की त्रासदी झेलते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की भी खासी कमी देखी गई है। वे जरा-सी बात पर नाराज हो जाते हैं, उनमें नशे की लत लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चे अपने आपको बहुत अकेला महसूस करने लगते हैं। लेकिन, क्या रिश्तों को टूटने से पहले ही नहीं संभाला जा सकता? बातों को इतना बड़ाया ही क्यों जाए कि वे इस कगार तक पहुंचे!
जब भी पति-पत्नी को लगे कि अब उनके रिश्ते में प्यार खत्म हो रहा है या आपसी समझ घटती जा रही है तो वे मिल-बैठकर बात कर सकते हैं। एक-दूसरे के साथ वक्त बिताकर समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। उनके मन में जो भी डर, असुरक्षा की भावना या शिकायत हो, उसे बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि फिर भी दम्पति आपस में अपनी समस्या नहीं सुलझा सकते तो इसके लिए ‘मैरिज काउंसलर’ और ‘मैरिज थैरेपी’ की मदद ली जा सकती है। मैरिज काउंसलर दोनों पक्षों की बात जानकर आपको सही सुझाव और सलाह देते हैं। इससे आप अपने रिश्ते को टूटने से बचा सकते हैं। मैरिज थैरेपी भी रिश्तों को बनाए रखने के लिए कारगर उपाय है। थैरेपी में मनोचिकित्सक काउंसलिंग के जरिए आपकी मदद कर सकते हैं।
यदि आपके लिए किसी प्रोफेशनल काउंसलर की सुविधा लेना संभव न हो तो आप परिवार के किसी ऐसे सदस्य या दोस्त, जो आप दोनों को भली-भांति जानता हो व दोनों के प्रति मन में समान भाव रखता हो, के साथ बैठकर अपनी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करें। पति-पत्नी चाहें तो व्यवहार में बदलाव से भी समस्याओं को सुलझा सकते हैं। पति-पत्नी में तलाक की मुख्य की वजह शराब का सेवन, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना, विवाहेत्तर संबंध, आधुनिक जीवन शैली के कुप्रभाव, अहम, अवसाद, उपेक्षा, वैचारिक मतभेद व गलतफहमी हैं। सहनशक्ति और सामंजस्य की मंशा का न होना भी अब संबंध-विच्छेद के लिए जिम्मेदार हैं। अक्सर पति-पत्नी को लगता है कि तलाक लेने से उनकी सारी समस्याओं का हल हो जाएगा, जबकि यह सच नहीं है। व्यवहार गलत होने पर आप किसी के भी साथ खुश और सुखी नहीं रह सकते हैं। फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। परिवार और समाज में रहने के लिए कुछ समझौते और बदलाव तो जरूरी हैं। यदि आप वह नहीं करना चाहते हैं तो इन बातों पर शादी से पहले ही विचार किया जाना चाहिए।
शादी के बाद अलग होने की नौबत न आए, इसके लिए बेहतर होगा कि आप जिससे शादी करने जा रहे हैं उसे जान लें। लड़का-लड़की आपस में एक-दूसरे के रहन-सहन और आदतों पर एक-दूसरे से खुलकर बात करें। एक-दूसरे से अपनी अपेक्षाओं को अवगत करा दें और किसी प्रकार का कोई दुराव-छुपाव न रखें, ताकि आप तलाक की त्रासदी झेलने से बच सकें।
देश के महानगरों में तलाक के मामले काफी बढ़ रहे हैं। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों के उच्च और मध्यम वर्ग में शादियों का दिन-प्रतिदिन टूटना अब मनोवैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय हो गया है। जहां तलाक को पहले अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता था वहीं अब कई युवा दंपत्ति इसे समस्याओं के समाधान के एकमात्र विकल्प के रूप में देखते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इन दिनों फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी 25 से 35 आयु वर्ग के दंपतियों द्वारा और वो भी शादी के महज 3 साल के भीतर ही दी जा रही है। निश्चय ही रिश्तों का जुड़ना और फिर इस तरह से टूटना सिवाय दर्द के कुछ नहीं देता। जो पति-पत्नी बच्चों के किशोरावस्था तक पहुँचने में यह निर्णय लेते हैं, उनके बच्चों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। अध्ययनों के मुताबिक जो बच्चे माता-पिता के अलगाव की त्रासदी झेलते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की भी खासी कमी देखी गई है। वे जरा-सी बात पर नाराज हो जाते हैं, उनमें नशे की लत लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चे अपने आपको बहुत अकेला महसूस करने लगते हैं। लेकिन, क्या रिश्तों को टूटने से पहले ही नहीं संभाला जा सकता? बातों को इतना बड़ाया ही क्यों जाए कि वे इस कगार तक पहुंचे!
जब भी पति-पत्नी को लगे कि अब उनके रिश्ते में प्यार खत्म हो रहा है या आपसी समझ घटती जा रही है तो वे मिल-बैठकर बात कर सकते हैं। एक-दूसरे के साथ वक्त बिताकर समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। उनके मन में जो भी डर, असुरक्षा की भावना या शिकायत हो, उसे बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि फिर भी दम्पति आपस में अपनी समस्या नहीं सुलझा सकते तो इसके लिए ‘मैरिज काउंसलर’ और ‘मैरिज थैरेपी’ की मदद ली जा सकती है। मैरिज काउंसलर दोनों पक्षों की बात जानकर आपको सही सुझाव और सलाह देते हैं। इससे आप अपने रिश्ते को टूटने से बचा सकते हैं। मैरिज थैरेपी भी रिश्तों को बनाए रखने के लिए कारगर उपाय है। थैरेपी में मनोचिकित्सक काउंसलिंग के जरिए आपकी मदद कर सकते हैं।
यदि आपके लिए किसी प्रोफेशनल काउंसलर की सुविधा लेना संभव न हो तो आप परिवार के किसी ऐसे सदस्य या दोस्त, जो आप दोनों को भली-भांति जानता हो व दोनों के प्रति मन में समान भाव रखता हो, के साथ बैठकर अपनी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करें। पति-पत्नी चाहें तो व्यवहार में बदलाव से भी समस्याओं को सुलझा सकते हैं। पति-पत्नी में तलाक की मुख्य की वजह शराब का सेवन, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना, विवाहेत्तर संबंध, आधुनिक जीवन शैली के कुप्रभाव, अहम, अवसाद, उपेक्षा, वैचारिक मतभेद व गलतफहमी हैं। सहनशक्ति और सामंजस्य की मंशा का न होना भी अब संबंध-विच्छेद के लिए जिम्मेदार हैं। अक्सर पति-पत्नी को लगता है कि तलाक लेने से उनकी सारी समस्याओं का हल हो जाएगा, जबकि यह सच नहीं है। व्यवहार गलत होने पर आप किसी के भी साथ खुश और सुखी नहीं रह सकते हैं। फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। परिवार और समाज में रहने के लिए कुछ समझौते और बदलाव तो जरूरी हैं। यदि आप वह नहीं करना चाहते हैं तो इन बातों पर शादी से पहले ही विचार किया जाना चाहिए।
शादी के बाद अलग होने की नौबत न आए, इसके लिए बेहतर होगा कि आप जिससे शादी करने जा रहे हैं उसे जान लें। लड़का-लड़की आपस में एक-दूसरे के रहन-सहन और आदतों पर एक-दूसरे से खुलकर बात करें। एक-दूसरे से अपनी अपेक्षाओं को अवगत करा दें और किसी प्रकार का कोई दुराव-छुपाव न रखें, ताकि आप तलाक की त्रासदी झेलने से बच सकें।
Saturday, December 21, 2013
बदल गया है योग्य जीवनसाथी का पैमाना
आज के दौर में जीवनसाथी की योग्यता और अयोग्यता का पैमाना पूरी तरह से बदल गया है। यही वजह है कि लड़के और लड़कियां अब अभिभावकों पर पसंद-नापसंद की बात रिश्ता तय होने से पहले करने लगे हैं। वर्तमान में वैवाहिक बंधनों को लेकर आजकल अभिभावकों को सबसे ज्यादा इन सवालों का सामना करना पड़ता है कि लड़के और लड़कियों में मैच है या नहीं। जिस लड़के का चयन अपनी बेटी के लिए करने जा रहे हैं वह वास्तव में उसके योग्य है या भी नहीं। लड़कियों की नजर में वह लड़का उनका जीवनसाथी बनने योग्य है, जो अपनी पत्नी की उपलब्धियों पर खुश हो तथा गर्व का अनुभव करे न कि ईष्र्या करे या उसकी प्रतिभा को रौंदने का काम करे।
हर लड़की ऐसा जीवनसाथी चाहती है जिस पर उसे गर्व हो यानी वह उसकी चाहत की कसौटी पर खरा उतरता हो। लड़कियाँ लड़के के रंग-रूप या कद-काठी की बजाए उसकी पढ़ाई-लिखाई कमाई और वैयक्तिक गुणों को अधिक महत्व देती हैं। यदि पति हैंडसम हो और गुणों की खान भी तो सोने पर सुहागा। हर लड़की कमाऊ लड़का के रूप में ही पति चाहती है। पत्नी की कमाई पर ऐश करने वाले या निर्भर रहने वाले लड़के को वह कभी पसंद नहीं करती। जो उनकी इच्छाओं और भावनाओं को समझते हुए उसकी कद्र कर सके। जो केवल उनका पति ही बनकर न रहे अपितु एक सच्चा दोस्त भी बने और सुख-दुख में साथ दे।
अलग हाईलाइट करें: लड़कियों की नजर में एक अच्छा पति वह है, जो अपनी पत्नी को अपने समकक्ष दर्जा दे न कि उसे अपने पैरों की जूती समझे। स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले को वह कभी जीवनसाथी बनाना नहीं चाहती, क्योंकि ऐसे लोग पत्नी पर हाथ उठाना या उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने में अपनी मर्दानगी समझते हैं।
हर लड़की ऐसा जीवनसाथी चाहती है जिस पर उसे गर्व हो यानी वह उसकी चाहत की कसौटी पर खरा उतरता हो। लड़कियाँ लड़के के रंग-रूप या कद-काठी की बजाए उसकी पढ़ाई-लिखाई कमाई और वैयक्तिक गुणों को अधिक महत्व देती हैं। यदि पति हैंडसम हो और गुणों की खान भी तो सोने पर सुहागा। हर लड़की कमाऊ लड़का के रूप में ही पति चाहती है। पत्नी की कमाई पर ऐश करने वाले या निर्भर रहने वाले लड़के को वह कभी पसंद नहीं करती। जो उनकी इच्छाओं और भावनाओं को समझते हुए उसकी कद्र कर सके। जो केवल उनका पति ही बनकर न रहे अपितु एक सच्चा दोस्त भी बने और सुख-दुख में साथ दे।
अलग हाईलाइट करें: लड़कियों की नजर में एक अच्छा पति वह है, जो अपनी पत्नी को अपने समकक्ष दर्जा दे न कि उसे अपने पैरों की जूती समझे। स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले को वह कभी जीवनसाथी बनाना नहीं चाहती, क्योंकि ऐसे लोग पत्नी पर हाथ उठाना या उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने में अपनी मर्दानगी समझते हैं।
Thursday, December 5, 2013
तालमेल ही बेहतर जीवन का आधार
प्रेम इंसान के उन भावनात्मक पहलुओं की कोमल अभिव्यक्ति है, जिसमें कि उसका स्वतंत्र भाव समर्पित रूप से समाया हुआ है। यह किसी तराजू का तौल नहीं, अपितु सुंदर कोमल भावनाओं का स्नेह भरा मोल है, जिसका परस्पर आदान-प्रदान आपसी संबंधों को मधुर व मजबूत बनाता है।
विवाह मात्र एक औपचारिकता भर नहीं। यह दो लोगों के परस्पर मन को जोड़ने वाला तार है। इसलिए यदि दांपत्य जीवन की लय-ताल में सरगम का मेल हो जाता है, वहीं अगर मन मिलने को राजी न हो, तो कर्कशता जिंदगी भर का साथ हो जाती है। दांपत्य जीवन से जुड़ी परंपराएं व त्योहार आपसी प्रेम तथा सामंजस्य को बल देते हैं। तो क्यों न हम गहराई को दांपत्य जीवन की नींव बना लें और गृहस्थी के आंगन में हमेशा चांद को चमकता देखें। पति-पत्नी में झगड़ा होने पर पति-पत्नी अक्सर बोलना बंद कर देते हैं। ऐसा करने से मन में अनेक शंकाएं जन्म ले लेती हैं। रिश्तों में दरार आती है, सो अलग। इसलिए मनमुटाव या तकरार होने पर संवाद द्वारा समस्या का हल निकालने का प्रयास करें। अपनी गलतियों को स्वीकारना भी सीखें। जहाँ प्यार होता है वहा तकरार होना लाजमी है।
हर इंसान में गुण-अवगणु के अंश होते हैं। भले ही कोई इंसान कितना भी अच्छा क्यों न हो उसमें भी बुराई हो सकती है। अपने जीवनसाथी की कमियों को लेकर विवाद करना दांपत्य जीवन में दरार पैदा करता है। इसलिए जीवनसाथी की कमियों की बजाए अच्छाइयों पर ध्यान दें । प्यार से समझाकर बुराइयां दूर करने का प्रयत्न करें। विचारों एवं स्वभावों का उचित सामंजस्य ही सुखी वैवाहिक जीवन का आधार हो सकता है।
वर्तमान में पति-पत्नी करियर को लेकर इतना खो जाते हैं कि एक-दूसरे को समय ही नहीं दे पाते और यहीं से रिश्तों में शिथिलता आने लग जाती है। इसलिए काम से फुर्सत निकालकर कुछ लम्हे आपस में जरूर बिताएं या कहीं घूमने जाएं। इससे जहाँ एक-दूसरे के दिल की बातें जानने का अवसर मिलेगा, वहीं रिश्तों में नयापन, अपनापन एवं प्रगाढ़ता भी आती है। रिश्ता पूरी तरह से दीया और बाती के समान है। पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे से अपनी बात मनवाने की अपेक्षा सुझावात्मक रूप में कहें कि यह कार्य यदि ऐसे किया जाए तो कैसा रहेगा। ऐसा करने से जहाँ आप मनमुटाव व तकरार से बच सकते हैं वहीं आपसी परामर्श द्वारा कार्य करने से अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं। किसी भी व्यक्ति के साथ तालमेल करने में अक्सर अहम बाधक बनता है कि मैं ही ये काम क्यों करूं, लेकिन पति-पत्नी सुख-दुख बांटने के लिए होते हैं। इसलिए आपस में सहयोग करने में कभी पीछे न रहें। पति पर आॅफिस के कार्यो का बोझ आने पर पर यथासंभव सहयोग करना चाहिए। वहीं घर के कामकाज में यदि आप एक-दूसरे की मदद करें, तो इससे प्यार बढ़ता है आपसी सहयोग से कठिन काम आसान भी हो जाते हैं।
प्रशंसा शब्द भले ही छोटा हो, परंतु आप जिसकी तारीफ करते हैं, उससे एक ओर उसकी कार्यकुशलता बढ़ती है। वहीं संबंधों में मधुरता भी आती है। इसलिए काम की प्रशंसा करने में कभी कंजूसी न करें। सराहना करना इस रिश्ते को और भी प्रगाढ़ता प्रदान करता है।
विवाह मात्र एक औपचारिकता भर नहीं। यह दो लोगों के परस्पर मन को जोड़ने वाला तार है। इसलिए यदि दांपत्य जीवन की लय-ताल में सरगम का मेल हो जाता है, वहीं अगर मन मिलने को राजी न हो, तो कर्कशता जिंदगी भर का साथ हो जाती है। दांपत्य जीवन से जुड़ी परंपराएं व त्योहार आपसी प्रेम तथा सामंजस्य को बल देते हैं। तो क्यों न हम गहराई को दांपत्य जीवन की नींव बना लें और गृहस्थी के आंगन में हमेशा चांद को चमकता देखें। पति-पत्नी में झगड़ा होने पर पति-पत्नी अक्सर बोलना बंद कर देते हैं। ऐसा करने से मन में अनेक शंकाएं जन्म ले लेती हैं। रिश्तों में दरार आती है, सो अलग। इसलिए मनमुटाव या तकरार होने पर संवाद द्वारा समस्या का हल निकालने का प्रयास करें। अपनी गलतियों को स्वीकारना भी सीखें। जहाँ प्यार होता है वहा तकरार होना लाजमी है।
हर इंसान में गुण-अवगणु के अंश होते हैं। भले ही कोई इंसान कितना भी अच्छा क्यों न हो उसमें भी बुराई हो सकती है। अपने जीवनसाथी की कमियों को लेकर विवाद करना दांपत्य जीवन में दरार पैदा करता है। इसलिए जीवनसाथी की कमियों की बजाए अच्छाइयों पर ध्यान दें । प्यार से समझाकर बुराइयां दूर करने का प्रयत्न करें। विचारों एवं स्वभावों का उचित सामंजस्य ही सुखी वैवाहिक जीवन का आधार हो सकता है।
वर्तमान में पति-पत्नी करियर को लेकर इतना खो जाते हैं कि एक-दूसरे को समय ही नहीं दे पाते और यहीं से रिश्तों में शिथिलता आने लग जाती है। इसलिए काम से फुर्सत निकालकर कुछ लम्हे आपस में जरूर बिताएं या कहीं घूमने जाएं। इससे जहाँ एक-दूसरे के दिल की बातें जानने का अवसर मिलेगा, वहीं रिश्तों में नयापन, अपनापन एवं प्रगाढ़ता भी आती है। रिश्ता पूरी तरह से दीया और बाती के समान है। पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे से अपनी बात मनवाने की अपेक्षा सुझावात्मक रूप में कहें कि यह कार्य यदि ऐसे किया जाए तो कैसा रहेगा। ऐसा करने से जहाँ आप मनमुटाव व तकरार से बच सकते हैं वहीं आपसी परामर्श द्वारा कार्य करने से अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं। किसी भी व्यक्ति के साथ तालमेल करने में अक्सर अहम बाधक बनता है कि मैं ही ये काम क्यों करूं, लेकिन पति-पत्नी सुख-दुख बांटने के लिए होते हैं। इसलिए आपस में सहयोग करने में कभी पीछे न रहें। पति पर आॅफिस के कार्यो का बोझ आने पर पर यथासंभव सहयोग करना चाहिए। वहीं घर के कामकाज में यदि आप एक-दूसरे की मदद करें, तो इससे प्यार बढ़ता है आपसी सहयोग से कठिन काम आसान भी हो जाते हैं।
प्रशंसा शब्द भले ही छोटा हो, परंतु आप जिसकी तारीफ करते हैं, उससे एक ओर उसकी कार्यकुशलता बढ़ती है। वहीं संबंधों में मधुरता भी आती है। इसलिए काम की प्रशंसा करने में कभी कंजूसी न करें। सराहना करना इस रिश्ते को और भी प्रगाढ़ता प्रदान करता है।
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