Tuesday, September 4, 2012

मूडी पार्टनर के साथ जीने के नुस्खे

पं. महेश शर्मा

अगर आपका पार्टर मूडी है तो भी आप वैवाहिक जीवन को खुशी-खुशी जी सकती हैं। आपको इसके लिए कुछ प्रयास करने होंगे। इस प्रयास में आप सफल भी हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए त्याग, धैर्य, सही सोच व शांत दिमाग की जरूरत होती है।

मूडी साथी मिलने का यह अर्थ नहीं है कि जिंदगी बेकार हो गई। निरंतर कोशिशें इन स्थितियों से उबार सकती हैं। आपको जरूरत है शादीशुदा जिंदगी की एक सामान्य समस्या को समझने की। सामान्यतया यह देखा जाता है कि उस समय आपके सारे मंसूबे धरे रह जाते हैं, जब मूडी पार्टनर से पाला पड़ता है। अच्छी पत्नी बनना आसान नहीं, लेकिन तब यह और मुश्किल होता है, जब पति मूडी हो। मूडी लोगों को समझना वाकई कठिन होता है। समझदारी और सकारात्मक नजरिये से स्थितियों को सुधारा जा सकता है।

1. शांत रहें। पति मूडी, उखड़ा-उखड़ा या उदास सा है तो खुद को शांत रखें। शांति से ही पत्नी घर के माहौल को बचाए रख सकती है।

2. साथी जरूरतें समझें। जो वह कह रहा है उन शब्दों का मर्म समझें। दुर्भाग्य से लोग यह नहीं समझ पाते कि ऐसी स्थिति में पारस्परिक संवाद कैसे जारी रखें। पति को भी केयर की जरूरत होती है। अगर कोई तरकीब काम न आये तो उसे कुछ समय अकेले छोड़ दें, ताकि वह कुंठा से बाहर निकल सके।

3. तो सकता है कि किसी खास कारण के चलते पति हीन महसूस कर रहा हो, अपेक्षित सफलता न मिलने से निराश हों। ऐसे में उसे पत्नी की सहानुभूति की आवश्यकता है।

4. घर का माहौल खुशगवार बनाए रखें। उसे व्यवस्थित रखें। जब पति को महसूस होगा कि उसकी पत्नी उसे खुष करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है तो संभव है धीरे धीरे वह अपनी मनोदशा से बाहर निकल जाए।

5. खुद को उदासीस और निराशा से बचाएं। अपनी सामान्य गतिविधियां बनाए रखें। अपना ध्यान रखें।

6. यदि पति स्वभाव से मूडी है तो उसे बदलने के बजाय खुद मस्त रहने की कोशिश करें। वह सामाािजक नहीं हैं तो पत्नी अपना दायरा बढ़ाए। पति के स्वभाव के कारण अपनी दुनियाि को सीमित न करें। हो सकता है, कभी पति पत्नी का अनुसरण करने लगे।

7. संबंधों पर आधारित पुस्तके भी कई बार मददगार साबित हो सकती हैं। अगर परेशानी किसी भी तरह हल न हो रही हो तो किसी काउंसलर की मदद ली जा सकती है।

8. किसी खास वजह से मूड खराब हो तो उस वक्त उस पर चर्चा न करें। बाद में मौका देखकर उस मुददे को छेड़ें। ध्यान रखें अगर कुछ मुदृदे ऐसे हैं, जिनसे पति का मूड और बिगड़ सकता हो तो उन्हें न छेड़ना ही बेहतर है।

9. साथी के लिए त्याग करने को तैयार हैं। यह बात पति-पत्नी दोनों पर लागू होती है। कोई भी संबंध परफेक्ट नहीं होता। आदर्श स्थिति वह है, जिसे हकीकत में पाना मुश्किल ही होता है। रिश्तों को समझने के समय निकालना जरूरी है। उन्हें मौका दें संवरने का।

10. उपहार दें। यह बात विषय से हटकर भले ही लगे, लेकिन कई बार बिना किसी खास मौके के मिला पसंदीदा उपहार भी मूड ठीक कर सकता है। यह सुगंधित इत्र हो सकता है, शेविंग क्रीम, पेन या घड़ी  आदि। छोटा सा यह उपहार साथी के प्रति प्यार को दर्शाता है।

आमतौर पर मूडी लोग खुशमिजाज लोगों को पसंद करते हैं। भले ही ऐसा शब्दों में जाहिर न करें। इसलिए अपनी दिनचर्या को अव्यवस्थित न होने दें। खुश रहें; अपनी ओर से साथी को खुश रखने की कोशिश जारी रखें।

शिक्षा ही सब कुछ नहीं


पं. महेश शर्मा

संबंधों के गणित में पति-पत्नी का सुखद जीवन इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों के दृष्टिकोण एक-दूसरे को समझने की वृत्ति पारदर्शिता आधारितर है या नहीे।

ममता शर्मा 27 साल की हैं। वह शोधरत है। उसके घर के लोगों का निजी कारोबार है और सुखी संपन्न हैं। घर की उसकी शादी की चर्चा होती रहती है। वह थोड़ी समझदार है, पर इतनी समझदार भी नहीं की वह जिंदगी के हर तंतु को समझ सके।

वह सजल नयनों से आकाश की ओर टकटकी लगाकर बैठी हुई है। आंखों से गालों को भिगोते आंसू टपक रहे हैं। उसके मानसपट पर जीवन के अंतिम पांच सात वर्ष अपना कब्जा जमाए बैठे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त लड़के को अपने जीवनसाथी के रूप में वरण करने की उसकी असीम इच्छा है। चूंकि वह खुद शिक्षित है इसलिए ऐसा सोचना स्वभाविक भी है।

अभिभावक और घर के दूसरे बुजुर्ग उसे समझाते हैं कि घर अच्छा हो, आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति वाला हो और अच्छी नौकरी या व्यवसाय हो तो उच्च शिक्षा के चोचले को पकड़कर रखना कोई समझदारी की बात नहीं। यह झूठा नखरा कहलाता है इस पर ममता जवाब में दलीलें करती कि यह सब नहीं होगा तो भी मुझे चलेगा, लेकिन उच्च शिक्षा ली होगी तो मुझे समझ तो पाएगा। कुदरत ने भी उसका पक्ष लिया। उसकी शादी एक डाक्टर से हुई। परंतु शैली का उच्च शिक्षा प्राप्त पति का सम्मोहन तो पहले महीने में ही टूट गया। मरीज की नब्ज परखने वाला यह डाक्टर उसकी संवेदनाओं को समझने में बिलकुल अनाड़ी है। उच्च शिक्षा वाले जीवनसाथी की उसकी सनक रह रहकर उसे समझा रही थी कि वक्त बीतने पर सबकुछ ठीक हो जाएगा।

परंतु उसका दुर्भाग्य बलवान होता गया। बरसों बीतने लगे, मन पर घाव लगते गए और अंत में आज आक्रामकता ने बगावत का रूप ले लिया। वह उसे सदा के लिए छोड़कर आ गई है। बिल्कुल सूने आकाश की ओर टकटकी लगाकर अपने बरसों की जुगाली कर रही है। उसका मन प्रश्न करता ही जाता है कि इतना पढ़ा लिखा व्यक्ति भी उसे समझ न पाये, इतनी तो वह जटिल नहीं ही है न !

यहीं पर आकर समझ में आता है कि रिश्तों के गणित में शिक्षा का कोई खास महत्व नहीं है। हालांकि ये बात सभी के उूपर लागू नहीं होता। हां, इतना जरूर है कि वह किस तरह होता है, इसका आधार उसकी शिक्षा पर जरूर रहता है। शादी या अन्य विजातीय रिश्तों में जितनी गांठ अपनढ़ लोगों के बीच पड़ती है, उतनी ही या शायद उससे अधिक गांठ पढ़े लिखे लोगों के बीच में भी पड़ती है। अलबत्ता उसकी अभिव्यक्ति और उसके परिणाम शैक्षिणिक स्तर के हिसाब से भिन्न जरूर होते हंै। कम शैक्षिणिक स्तर वाले शायद सबके सामने लडेंगे, मारपीट कर बैठते हैं, जबकि शिक्षा प्राप्त  बेडरूम की चार दीवारों के बीच यही काम करते हैं। कहने का मतलब ये है कि एसएससी पास पत्नी और डाक्टर पत्नी के कलह में या सामान्य ग्रैजुएट पति और एमबीए पति में अधिक फर्क नहीं होता। फर्क तो वहां होता है जहां समझ होती है।

जिस रिश्ते में दो व्यक्ति एक-दूसरे को सही मायनों में समझते हैं। उस रिश्ते की उष्मा अलग होती है और वहां पढ़ाई का कोई हिस्सा नहीं होता।  रिश्तों के गतिण में व्यक्ति का उस रिश्ते के प्रति दृष्टिकोण, एक-दूसरे को समझने की भावना, विश्वास, माफ करने की वृति, पारदर्शिता, संवेदनाएं आदि महत्वपूर्ण घटक हैं।

दुर्भाग्य की बात यह है कि इनमें से कोई भी बात हमारी शिक्षा व्यक्ति को नहीं सिखाती। ये गुण पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था व परवरिश से विकसित होते हैं। कहने का मतलब ये है कि दांपत्य जीवन की सफलता का आधार ये है कि एक व्यक्ति के रूप में पति पत्नी एक-दूसरे को कितना समझते हैं।

Wednesday, May 9, 2012

प्यार ही जिंदगी है

पं. महेश शर्मा

जो लोग बार बार पूछते है कि प्यार क्या है तो उन्हें जरा पीछे मुड़कर देख लेना चाहिए। वैसे भी इस मामले में आम लोगों के अनुभव से भी बहुत कुछ समझा जा सकता है।

कहते हैं न कि प्यार अंधा होता है। मगर षादी आंखें खेल देती हैं। अंग्रेजी निबंधकार बेकन ने कहा था, जिन्होंने षादियां की और बच्चे जने, अपनी किस्मत को उन्होंने किसी अन्य के पास बंधक रख दिया। वह आगे कहते हैं कि स्वयं को एक रात में सात साल अधिक अनुभवी बनाना चाहते हैं तो आपको फौरन षादी कर लेनी चाहिए।

एक दूसरे विचारक का मत है कि जब भी मुझे किसी के विवाह का निमंत्रण मिलता है तो लगता है कि किसी घनिश्ठ मित्र की आत्महत्या का समाचार आया है। सच तो यह है कि षादी कैसी भी हो, है सारी मुसीबतों की जड़।

लव मैरिज और अरेंज्ड मैरिज में यही अंतर है। एक आत्महत्या है तो दूसरी हत्या। बेंसन ने तो यहां तक कहा है कि विवाह के इच्छुक पुरुश को मेरी अंतिम राय है, अरे मूर्ख! अभी भी समय है भाग जाओ। कबीर व रहीम जैसे कामयाब लव गुरुओं ने प्रेम को बहुत गंभीरता से षुरू करने की सलाह दी है। वे आषिक और महबूत दोनों को बार बार चेतावनी देते हैं कि वे प्रेमजाल में न ही फंसे तो बेहतर है, क्योंकि बहुत कठिन है डगर पनघट की। ऐसी चेतावनी हर स्पीड ब्रेकर से पहले लिखी होती है। स्पीड ब्रेकर वहीं लगाए जाते है। जहां दुर्घटना की प्रबल आषंका होती है।

सही मायने में प्रेम का अर्थ ये नहीं है, पर हमारे नायक नायिका प्रेम होते ही षादी के सपने देखने लगते हैं। आज के लवगुरू वहीं टेक्निक सिखाते हैं कि प्रेम के मजे लूटो पर षादी के फंदे में मत फंसो।

तभी तो षादी में बहुत पहले चेतावनी दी जाती है। आजकल सात आठ महीनों तक मंगनी रखी जाती है। भागने की पूरी छूट रहती है। समझदार आदमी चाहे तो षादीषुदा लोगों का सर्वे करके पूछ सकता है कि एक कप चाय की तलब का मारा इंसान चाय का ढांचा खोल ले तो उसकी कैसी दुर्दषा हो जाएगी।

इन बातों से अलग हकीमत में प्यार में केवल दुर्घटनाएं ही नहीं होती हैं। प्यार व षादी इंसान को बहुत कुछ देती भी है। इसलिए बेहतर तो यही है कि आप प्यार करें। जिसे लोग प्यार के नाम पर बंधन, आजादी का क्षीण होना, गुलामी, कम समय में ज्यादा अनुभव पाना कहते हैं, मेरे हिसाब से वही तो जिंदगी है। ये सोचने के अपने अपने मायने हैं। अरे भाई प्यार करेंगे और षादियां होंगी तो बच्चे भी होंगे। इसमें कौन सी नई बात है।

इसलिए संबंध जिम्मेदारी को मुसीबत न समझें। यही तो आपको जीना सिखाता है। एक-दूसरों के लिए। बोध कराता है आपको बहुत कुछ करना है। लव गुरु, कबीर और रहीम बातें बहुत की है पर आपने कभी सोचा है कि लोग षादी न करें तो कैसी जिंदगी होगी।

प्यार ही ऐसी चीज है जो लोगों को आपस में बांधकर रखता है। अनुषासन में रहना सिखाता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारियों से भागना नहीं सिखाता। इसलिए षादी करें सबके साथ मिलकर। सभी को साथ लेकर, लेकिल कुछ बातों का ध्यान रखें।


- आप तय कर लें कि अब अकेले की जिंदगी नहीं सामूहिक जिंदगी जीना है।

- मौज मस्ती करेंगे पर पहले की तरह नहीं। सबके साथ मिलकर।

- पारिवारिक जिम्मेदारी पहले उसके बाद कोई और काम।

- पत्नी कोई बंधन नहीं साथी है इसलिए उसे हर मौज मस्ती में अपने साथ रखें।

- ऐसी मौज मस्ती ही क्या जिसमें आपकी पार्टनर आपके साथ न रह सके।

- अगर ऐसा है तो आप भी सही रास्ते पर नहीं है। इसके लिए षादी या प्यार को दोश न दें।

- ये जिम्मेदारी है इसे सलीके से जीना तो पड़ेगा ही। इसमें मनमौजी होने से काम नहीं चलता, क्योंकि यह आपको आदर्ष जीवन देता है।

जो हर दिल पर राज करे

पं. महेश शर्मा

सभी की यह ख्वाहिश होती है कि घर में आने वाली दुल्हन ऐसी हो जो सबको एक ही नजर में भा जाए और सभी उसे अपना प्यार दें।

ऐसा सोचना स्वभाविक है। शादी के बाद रिश्ता सिर्फ एक व्यक्ति से नहीं बल्कि पति के पूरे परिवार के साथ आपका बनता है। इन ढेर सारे रिश्तों के बीच अपनी खास जगह बनाने का क्या है फार्मूला जान लेना भी आपके लिए जरूरी है ताकि आपकी भी शादी होने वाली है तो आप भी बन सके अपने ससुराल में सबकी मनपसंद बहू।

हमेशा रहें खुश

आपका पता है क्यूं! संगीता की सास को अपनी बहूू का खुशदिल होना बहुत पसंद आया। उनका कहना था कि आमतौर पर बहुओं को इतनी दुनियादारी सिखाकर भेजा जाता है कि अपनत्व की भावना दिखाई देनी बंद हो जाती है। लेकिन मेरी नई नवेली बहू में एक ओर जहां समझदारी है, वहीं किशोर लड़कियों जैसा उत्साह और उमंग भी। वह हर समय विदाई और घर छूटने के दुख तले दबी सी महसूस नहीं होती।

समझदारी

मेरी बहू ने पीएचडी कर रखी है। उच्चतर शिक्षा की उुंची समझ उसके व्यवहार और बातें से साफ पता चल जाता है। कम उम्र में यूनिवर्सिटी में क्लासेज लेने भी जाती है। फिर भी रूढि़वादी रिश्तेदारों के सामने उसने अपनी पढ़ाई और प्रगतिशीलता प्रदर्शित करने की गलती नहीं की।

तालमेल

उसने सकुचाहट और समझदारी में सही तामलमेल बैठाया। नई नवेली दुल्हन होने के बावजूद जरूरत महसूस होने पर सास और ननद की मदद करने में उसे परेशानी महसूस नहीं हुई। बस फिर क्या था घर वालों के साथ वह मेहमानों के बीच भी लोकप्रिय हो गईं।

रिलैक्स

उसकी सास कहती है कि उनकी बहू यानी संगीता की एक बात और भी अच्छी लगी। वह है उसका छुई मुई न होना। बात बात पर चक्कर खाकर गिर जाने वाली लड़की को बहू के रूप में पाने की कल्पना से ही वह डर जाती थीं। वह सुंदर है, लेकिन वह कमजोर नहीं। इसलिए वह रिलैक्स महसूस करती हैं।


ये बात तो हुई संगीता की, पर आप भी अगर हर दिल चहेती बहू बनना चाहती हैं तो इनमें से कुछ बातों का ध्यान रखें। अपने जीवनसाथी के साथ ही हर दिल अजीज हो जाएंगी।

हसीन पलों को यूं रखें तरोताजा

पं. महेश शर्मा

यह सच है कि समय गुजरने के साथ व्यक्ति शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से बदलने लगता है। यदि वह बदलाव सामान्य है तब तो ठीक है, नही ंतो ऐसा लगता है जैसे कि आपसी संबंधों की मिठास धीरे धीरे कम होने लगी है।

सुखद जिंदगी के लिए जरूरी है कि जिंदगी के इस खूबसूरत रिश्ते पर पड़ी धूल को हटाए जाएं। रिश्तांे को पुनर्जिवित करना जरूरी होता है, क्योंकि ऐसा करने से आपका प्यार हमेशा जिंदा रहता है और आप अपने संबंधों में हर रोज ताजगी का अहसास करते हैं। इस बात को संभव बनाने के लिए आपको चाहिए कि कुछ बातों का हर वक्त ख्याल रखें।

परवाह करें

दांपत्य रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें पति पत्नी जब एक साथ होते हैं तो एक दूसरे की अहमियत का अहसास नहीं होता। जब साथ ठूटता है तो उस क्षति को भरना असंभव होता है। तो क्यों न रिश्ते की अहमियत हमेशा समझी जाए, क्यों न समय समय पर इस अहसास को जगाया जाए। क्यों न जीवनसाथी को कभी कभी इस बात का अहसास करवाया जाए कि हां, मुझे अब भी तुम्हारी परवाह है। इसका गणित बहुत सुलझा हुआ है। सीधे साधे तरीके कभी आजमाकर देखें तो लगेगा कि ये तो कितना सरल है। इसके लिए सबसे बेहतर यह है कि आपको अपने मन में प्यार का जो ख्याल उभरकर आये उसे आजमा कर देखें। आपको उसी में जिंदगी का आनंद मिलेगा।

कंजूसी नहीं बरतें

हर इंसान चाहता है कि कोई उसकी तारीपफ करे। ये चीज उम्र की गुलाम नहीं होती। किसी भी उम्र के स्त्री या पुरुष को अपनी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है। उसे सुनना तो और सुकून भरा हो जब जीवनसाथी एक दूसरे की तारीफ कर रहे हों। और जब ऐसा करने से खुशियां मिलती है तो इसमें कंजूसी नहीं करनी चाहिए।

छू मंतर कहिए गिले शिकवे को

यह जरूरी है कि आप दोनों अपने साथ शिकायतों की पोटली लेकर न रहें। और न ही कामों की लिस्ट और उलाहनों की लंबी सूची साथ रखें। बल्कि साथ ले जाएं अपनी कुछ पुरानी मधुर यादें और भविष्य की योजनाएं, जिन पर बात कर आप दोनों को अच्छा लगे। वैसे भी जिंदगी के प्रति ये सकारात्मक नजरिया बहुत कुछ देती है। यह ठीक है कि हरेक की व्यक्तिगत रुचि, पसंद नापसंद अलग होती है, पर एक दूसरे की पसंद और रुचियों का ध्यान जरूर रखें।
गिफ्ट

याद रखें कि नजदीकी और प्यार भरा स्पर्श रिश्तों को दुबारा से जीवित करते है।  इसलिए इसे अहमियत देने के साथ साथ कभी कभी अपनी पत्नी या पति को उसकी पसंद का कोई उपहार भी दें। उपहार का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं होता, उससे जुड़े जज्बात मायने रखते हैं। प्यार में दिया गया एक छोटा सा गुलाब, पेन या जरूरत की कोई चीज भी महत्वपूर्ण होती है।

गहरा करें प्यार के रंग

प्यार का रिश्ता एक अनमोल व खूबसूरत रिश्ता है। इसकी अहमियत को समझने की जरूरत होती है। इसमें संदेह नहीं कि शादी के बाद जिम्मेदारियों के बोझ तले आपका प्यार ही कहीं खो जाता है, लेकिन आप दोनों को एक दूसरे की जरूरत हैं। इसलिए हर मोड़ पर एक-दूसरे का भागीदार बनें ताकि जिंदगी की दोस्ती का यह रंग और भी गहराता जाए और फिर कभी  आपके मन में ऐसा ख्याल नहीं आये कि आपको गुनगुनाना पड़े कहां गए वो दिन।

सबकुछ बताने में भलाई

पं. महेश शर्मा

पुरुष प्रधान समाज होने की वजह से आज भी अधिकांश पुरष महिलाओं की जिम्मेदारियों को किचन तक सीमित मानते हैं। लेकिन समय बदल गया है, इसलिए हर व्यक्ति का चाहिए कि आज के दौर में लाइफ पार्टनर हर मामले में साथ साथ रखें।

बहुत से पुरूष जरूरी कागजात जैसे कि बीमा पॉलिसी, जमीन-जायदाद, म्युचुअल फंड आदि के बारे में अपनी जीवन संगिनी को बताने में लापरवाही बरतते हैं। इसके पीछे पुरूष होने का भाव भी कहीं छिपा रहता है तथा यह सोच भी काम करती है कि जब मैं जिंदा हूं तो सब मेरी ही जिम्मेदारी है।

बेशक आप का विश्वास है कि आप दीर्घायु होंगे, पर जीवन के हर पहलू पर सोचकर जिंदगी जी जाती है तो भविष्य में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। एक उदाहरण से बात शुरू करते हैं। अनूप की 41 वर्ष की अल्प आयु में ज्ज्दयाघात से अचानक मृत्यु हो गई। परिवार में पत्नी के अलावा दो छोटे-छोटे बच्चे व मां-बाप थे। उसने व्यवसाय खूब फैला रखा था, लेकिन अपने लेन-देन, जमीन-जायदाद, बैंक खाते, बैंक लॉकर, बीमा पॉलिसियों के बारे में अपनी पत्नी को कुछ भी नहीं बताता था और न ही कहीं लिखकर रखता था। शायद पत्नी को बताना आवश्यक नहीं समझा या उसकी काबलियत पर भरोसा नहीं था या फिर टैक्स वालों का डर था। लेने वालों ने घर के सामने लाइन लगा दी लेकिन देने वाले गायब हो गए। परिवार के सामने अंधेरा छा गया, बच्चे बिलखने लगे, पत्नी बेबस हो गई, रिश्तेदार आंख चुराने लगे।

एक समय था जब हमारे बुजुर्ग बड़े ही विश्वास के साथ छाती ठोककर कहते थे कि हम 100 वर्ष तक जिएंगे।
पहले संयुक्त परिवार होते थे, व्यापार में भी इतना फैलाव नहीं था। खान-पान अच्छा था, मेहनत करते थे, तनाव मुक्त हंसी-खुशी जीवन व्यापन करते थे। परिवार में अचानक हादसा होने पर भी घर के दूसरे सदस्य संभाल लेते थे। इतनी कठिनाई नहीं होती थी। आज हालात अलग हैं। एकल परिवार है। जीवन के हर पड़ाव में तनाव है। क्षमता से ज्यादा व्यापार का फैलाव कर रखा है। खान-पान का ठिकाना नहीं है। मेहनत बिलकुल नदारद है। कब यमराजजी से बुलावा आ जाए, कोई भरोसा नहीं।

इसलिए यह जरू री हो जाता है कि आप अपनी जीवन संगिनी को अपने कारोबार के बारे में पूरी जानकारी दें। किससे कितना लेना या देना है, जमीन जायदाद के कागजात कहां रखे हैं, बैंक खाते कहां-कहां खोल रखे हैं, म्युचुअल फंड व शेयर के प्रमाण पत्र कितने हैं और कहां रखे हैं, डिमेट या नामांकन करा रखे हैं या नहीं, गहने कितने व कहां रखे हैं, बैंक लॉकर का नंबर क्या है, कौन से बैंक में है, चाबी कहां रखी है तथा लॉकर में क्या-क्या रखा हैक् बीमा पॉलिसियां कितनी हैं, कहां रखी हैक् इन सबकी जानकारी का आपकी पत्नी को ज्ञान होना अति आवश्यक है। पत्नी को बताने में हीन भावना महसूस नहीं करनी चाहिए।

पत्नी का भी फर्ज बन जाता है कि वह अपनी रसोईघर के अलावा भी दूसरी पूरी जानकारी रखें, ताकि जरू रत पड़ने पर किसी की मोहताज न हो सके। अक्सर यह भी देखने में आता है कि पति सब कुछ बताना चाहता है मगर पत्नी भावुकता में समझने व जानने का प्रयास नहीं करती।

अगर आप अचानक हादसे से अपने परिवार को दु:खी होने से बचाना चाहते हैं तो कुछ विशेष बातों पर ध्यान दें और पहले ही सुरक्षा इंतजाम कर ले तो अच्छा होगा। बैंक अकाउंट, बैंक लॉकर, म्युचल फण्ड व शेयर आदि में पति-पत्नी का संयुक्त खाता होना अधिक अच्छा है। बीमा, बैंक, लॉकर आदि के सभी कागजात में नामांकन भी अवश्य करा लें। जब भी मौका मिले तो अपनी जीवन संगिनी को बैंक, ऑफिस या दुकान, बीमा दफ्तर साथ लेकर जाएं ताकि उसके लिए कोई अपरिचय वाली बात न रहे, उसे डर नहीं रहेगा। हादसे के बाद अपने को असहाय महसूस नहीं करेगी। किसी पर निर्भर नहीं रहेगी और अपने परिवार की गाड़ी को अच्छी तरह से चला सकेगी। औरत को कमजोर या नासमझ समझना अपनी सबसे बड़ी भूल है। जरू रत पड़ने पर आपकी पत्नी इतने अच्छे सुझाव देगी, हौसला बुंदी करेगी कि आप दांतों तले अंगुली चबा लेंगे।

प्रत्येक महत्वपूर्ण दस्तावेज की अलग-अलग फाइलें बनाकर अपनी पत्नी को अवगत करा दें। उन्हें अपडेट भी करते रहें। काम भी सुव्यवस्थित होगा। आप अपनी वसीयत भी एक अच्छी वकील या ऑडिटर से बनवा लें। इसमें कभी टालमटोल न करें। कोर्ट-कचहरी के चक्कर से अपने परिवार को बचाना है तो स्पष्ट प्रावधान दर्शाती वसीयत बनवा लें। विशेष बात का ध्यान रखें कि अपने जीते जी सब कुछ बेटों में बांटकर खाली हाथ न हो जाएं क्योंकि जरू रत पड़ने पर वृद्धावस्था में हाथ फैलाने को मजबूर होना बहुत ही कष्टदायक हो जाता है। यह अच्छा होगा यदि वसीयत में जीवन संगिनी के लिए समुचित प्रावधान हो।
जीवन में ये बातें इतनी ही जरू री हैं जितना कि पेट भरने के लिए खाना। इस यथ

हमेशा रहें सेहतमंद

पं. महेश शर्मा
  
हर कोई स्वस्थ और फिट रहना चाहता है। किसी विटामिन या मिनरल की कमी का पता चलते ही हम दवाओं का सहारा लेने लगते हैं या फिर खानपान पर खास ध्यान देने लगते हैं। पर कई ऐसी बातें होती हैं जो हमें अंदर से स्वस्थ और ऊर्जावान बनाये रखती हैं। 

स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा और कारगर मंत्र फील गुड फैक्टर है। लोग कहते हैं कि अच्छा या स्स्वस्थ दिखना ही फिटनेस है लेकिन यह सोच सही नहीं है। जब तक अंदर से स्वस्थ महसूस नहीं करते तब तक हम पूरी तरह से स्वस्थ हो ही नहीं सकते। 

लोग मोटापे को लेकर कम ही सजग होते हैं। पर कई ऐसे भी हैं जो जरा सा मोटापा होते ही डाइटिंग करने लगे जाते हैं और कई चीजें सामने आने पर मन को मार देते हैं। जबकि खानपान की चीजों के प्रति हमारा रवैया अच्छा है तो नुकसान नहीं होगा। भोजन के प्रति नकारात्मक व्यवहार तो कतई नहीं होना चाहिये। हां, ज्यादा खा लेने से नुकसान जरूर हो सकता है।

कड़ी मेहनत स्वस्थ रहने का मूल मंत्रा है। पर इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप सिर्फ काम ही करते रहें। सदियों से भारतीय समाज में योग व व्यायाम सर्वोत्तम स्वास्थ्य के बेहतरीन उपाय रहे हैं।
सकारात्मक ऊर्जा बचाये रखने से व्यक्ति हमेशा प्रसन्नचित रहता है। और खुश रहना स्वास्थ्य के लिए उतना ही जरूरी है जितना कि जिंदा रहने के लिए भोजन। आप हमेशा अच्छा महसूस करते हैं तो आपसे बेहतर स्वस्थ और कोई नहीं हो सकता। तनावग्रस्त माहौल में तो स्वस्थ रहना सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए संगीत के साथ व्यायाम करना, गहरी सांस लेना और टहलना आपके अंदर आमूलचूल परिवर्तन ला सकते हैं। जो लोग अपने शरीर की मांग को समझते हैं वो यह सब करने के लिए तैयार रहते हैं।
कई ऊर्जाएं हैं जो हमारे चारों तरफ हमेशा बरकरार रहती हैं। सही खानपान, सही सोच विचार, सही संबंध और सही धार्मिक क्रियाएं हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा को पैदा करती रहती हैं।